राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में अपनी ही सर्विस रिवॉल्वर से संदेहास्पद परिस्थितियों में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुए थानाधिकारी (SHO) की आखिरकार इलाज के दौरान मौत हो गई। गोली उनकी कनपटी को चीरते हुए आर-पार निकल गई थी।
हादसे के बाद उनकी अत्यंत नाजुक हालत को देखते हुए बांसवाड़ा से 157 किलोमीटर दूर उदयपुर के महाराणा भूपाल अस्पताल तक एक विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाकर बेहद तेज गति से एंबुलेंस के जरिए पहुंचाया गया था। हालांकि, डॉक्टरों की तमाम कोशिशों और लगातार कई घंटों तक चले इलाज के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस दुखद घटना के बाद पूरे पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई है।
1. ड्यूटी के दौरान संदेहास्पद परिस्थितियों में चली गोली
यह दर्दनाक घटना बांसवाड़ा जिले के कलिंजरा थाने में घटित हुई, जहाँ तैनात थानाधिकारी (एसएचओ) अपने सरकारी चैंबर में मौजूद थे। दोपहर के समय अचानक उनके कमरे से गोली चलने की जोर की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनते ही थाने में मौजूद अन्य पुलिसकर्मी और स्टाफ तुरंत उनके चैंबर की तरफ भागे।
कमरे का नजारा देखते ही थाने में हड़कंप मच गया। एसएचओ अपने रिवॉल्वर के पास खून से लथपथ हालत में अपनी कुर्सी पर अचेत पड़े थे। गोली उनकी दाहिनी कनपटी पर लगी थी और सिर को चीरती हुई दूसरी तरफ निकल गई थी।
2. स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उदयपुर रेफर
घटना के तुरंत बाद थाने के सहकर्मियों ने बिना एक पल भी गंवाए घायल थानाधिकारी को तुरंत बांसवाड़ा के जिला महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया। प्राथमिक उपचार के दौरान डॉक्टरों ने देखा कि अत्यधिक खून बह जाने और सिर में गंभीर अंदरूनी चोट आने के कारण उनकी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई थी।
स्थानीय डॉक्टरों की टीम ने पाया कि उनके जीवन को बचाने के लिए तुरंत न्यूरोसर्जरी और आधुनिक आईसीयू सपोर्ट की सख्त जरूरत थी, जो स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं था। इसके बाद डॉक्टरों के पैनल ने उन्हें तुरंत उदयपुर के उच्च स्तरीय मेडिकल कॉलेज और महाराणा भूपाल अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
3. 157 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पहुंचाया गया अस्पताल
थानाधिकारी की हर बीतते मिनट के साथ गिरती सांसों को ध्यान में रखते हुए पुलिस और प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया। बांसवाड़ा से उदयपुर की 157 किलोमीटर की दूरी को तय करने में सामान्यतः तीन से साढ़े तीन घंटे का समय लगता है।
पुलिस प्रशासन ने तुरंत बांसवाड़ा से उदयपुर तक के पूरे हाईवे मार्ग पर 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाने का निर्देश जारी किया:
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ट्रैफिक कराया गया पूरी तरह डायवर्ट: एंबुलेंस के रास्ते में आने वाले सभी चौराहों, मुख्य बाजारों और टोल प्लाजा पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
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जीपीएस ट्रैकिंग और एस्कॉर्ट वाहन: एंबुलेंस के आगे-आगे पुलिस की पायलट गाड़ी सायरन बजाती हुई रास्ता साफ कराती चल रही थी।
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रिकॉर्ड समय में तय हुआ सफर: इस विशेष ग्रीन कॉरिडोर व्यवस्था के कारण एंबुलेंस ने 157 किलोमीटर की दूरी महज कुछ ही मिनटों में तय कर ली और मरीज को बिना किसी ट्रैफिक बाधा के सीधे उदयपुर अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया।
4. आईसीयू में डॉक्टरों की टीम जुटी रही, पर नहीं बच सकी जान
उदयपुर अस्पताल पहुंचते ही विशेषज्ञों और न्यूरोसर्जन की एक विशेष टीम ने एसएचओ को तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर लेकर इलाज शुरू कर दिया। उनके सिर का तुरंत सीटी स्कैन किया गया और बहते खून को रोकने के लिए आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया अपनाई गई।
हालांकि, गोली के कनपटी से आर-पार हो जाने के कारण मस्तिष्क का काफी बड़ा हिस्सा और मुख्य नसें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं। डॉक्टरों की टीम ने कई घंटों तक चले लाइफ सपोर्ट सिस्टम के बाद भी उन्हें बचा पाने में सफलता हासिल नहीं की और आखिरकार उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
5. दुर्घटना या खुदकुशी? पुलिस कर रही है हर पहलू से जांच
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, फॉरेंसिक टीम (FSL) और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ कलिंजरा थाने पहुंचे। घटना स्थल को पूरी तरह से सील कर दिया गया है और सबूत जुटाए जा रहे हैं।
पुलिस प्रशासन इस मामले में दो प्रमुख कोणों पर गहनता से जांच कर रहा है:
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तकनीकी या दुर्घटनावश गोली चलना: क्या सर्विस रिवॉल्वर की सफाई या उसे संभालते समय अनजाने में ट्रिगर दब गया था?
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मानसिक तनाव का पहलू: क्या एसएचओ किसी पारिवारिक, व्यक्तिगत या विभागीय काम के मानसिक तनाव से जूझ रहे थे, जिसके कारण यह कदम उठाया गया?
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट, बैलिस्टिक जांच और मृतक के परिजनों व सहकर्मियों के बयानों के आधार पर ही गोली चलने की असली वजह का खुलासा हो पाएगा। इस दुखद हादसे के बाद मृतक अधिकारी के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।

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