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बिहार से देशभर में MBBS सीटों की कथित डील, NRI कोटे के नाम पर करोड़ों का खेल



पटना। मेडिकल प्रवेश में कम अंक वाले अभ्यर्थियों को भी NRI कोटे के जरिए MBBS सीट दिलाने का दावा करने वाले एजेंटों के एक कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। एक पड़ताल में एजेंट ने दावा किया कि अभ्यर्थी किसी भी अंक के साथ NRI कोटे की सीट हासिल कर सकता है। इसके लिए भारत में 30 हजार रुपए देने और करीब एक करोड़ रुपए की रकम विदेश से अभ्यर्थी के खाते में भेजे जाने की बात कही गई।

एजेंट के कथित बयान के मुताबिक, अमेरिका या दुबई से लेनदेन दिखाकर अभ्यर्थी को NRI के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। हालांकि, ऐसे दावों की वैधानिकता और वास्तविकता की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

अलग-अलग राज्यों तक फैला बताया जा रहा नेटवर्क

पड़ताल में सामने आए दावों के अनुसार, बिहार से जुड़े कुछ बिचौलियों का संपर्क देश के कई राज्यों में सक्रिय एजेंटों से बताया गया। बातचीत में मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और अन्य राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की व्यवस्था कराने के दावे सामने आए।

एजेंटों के बीच छात्रों के अंक, श्रेणी, पसंद और बजट जैसी जानकारी साझा करने तथा उसके आधार पर कॉलेज और कोटे के विकल्प सुझाने की बात भी सामने आई।

कम अंक वाले छात्रों को बनाया जा रहा निशाना

कथित नेटवर्क में कम अंक हासिल करने वाले NEET अभ्यर्थियों को खास तौर पर संपर्क किए जाने की बात सामने आई। बातचीत के दौरान 215 से 220 अंक वाले अभ्यर्थियों के लिए भी अलग-अलग राज्यों में MBBS सीट उपलब्ध कराने के दावे किए गए।

एक एजेंट ने करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए तक के पैकेज का दावा किया। हालांकि, ये सभी रकम और सीट उपलब्ध कराने के दावे संबंधित एजेंटों की बातचीत पर आधारित हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना बाकी है।

NRI दस्तावेज और प्रायोजक की व्यवस्था का दावा

कथित एजेंटों ने ऐसे अभ्यर्थियों के लिए भी रास्ता निकालने का दावा किया, जिनके पास NRI से जुड़े जरूरी दस्तावेज नहीं हैं। बातचीत में NRI प्रायोजक उपलब्ध कराने और दस्तावेज तैयार कराने जैसी बातें सामने आईं।

एक एजेंट ने दावा किया कि अभ्यर्थी के परिवार की ओर से दी जाने वाली राशि को विदेश से आने वाले भुगतान के तौर पर दिखाया जा सकता है। इस तरह की व्यवस्था के दावे गंभीर सवाल खड़े करते हैं, क्योंकि प्रवेश प्रक्रिया में गलत दस्तावेज या गलत जानकारी का इस्तेमाल कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।

करोड़ों के पैकेज, अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग रकम

पड़ताल में एजेंटों की ओर से अलग-अलग कॉलेजों और राज्यों के लिए अलग-अलग रकम बताए जाने की बात सामने आई। कुछ मामलों में एक करोड़ रुपए से अधिक के पैकेज का दावा किया गया।

बातचीत में कॉलेज फीस के अलावा दस्तावेज, NRI प्रायोजक, काउंसलिंग और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर अलग रकम लेने की बात भी सामने आई। कुछ एजेंटों ने विदेश से लेनदेन कराने की व्यवस्था होने का दावा किया।

एक एजेंट से दूसरे तक पहुंचता है अभ्यर्थी

कथित व्यवस्था में एक ही व्यक्ति पूरी प्रक्रिया संभालने के बजाय अलग-अलग लोगों को अलग जिम्मेदारी दिए जाने का दावा सामने आया। पहले छात्र की जानकारी जुटाई जाती है। इसके बाद कॉलेज और कोटे के विकल्प बताए जाते हैं।

जरूरत पड़ने पर दूसरा व्यक्ति दस्तावेज और प्रायोजक से जुड़ा काम संभालता है, जबकि अन्य बिचौलिये काउंसलिंग, पंजीयन और भुगतान की प्रक्रिया देखने का दावा करते हैं। इस तरह अभ्यर्थी एक एजेंट से दूसरे एजेंट तक पहुंचता है।

NRI कोटे के नाम पर सावधानी जरूरी

मेडिकल प्रवेश में NRI कोटे के लिए निर्धारित पात्रता और दस्तावेज जरूरी होते हैं। किसी अभ्यर्थी को गलत पहचान या फर्जी दस्तावेज के आधार पर NRI दिखाकर प्रवेश दिलाने का दावा गंभीर मामला हो सकता है।

मेडिकल प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए जरूरी है कि वे किसी एजेंट के मौखिक आश्वासन के बजाय संबंधित कॉलेज, राज्य की काउंसलिंग व्यवस्था और आधिकारिक प्रवेश नियमों से जानकारी की पुष्टि करें।

नोट: ऊपर बताए गए रकम, नेटवर्क और प्रवेश कराने के दावे एजेंटों की कथित बातचीत पर आधारित हैं। इन्हें संबंधित संस्थानों या जांच एजेंसियों द्वारा प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।




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