पटना। बिहार में पंचायत चुनाव से पहले ग्राम पंचायतों की सीमाएं नए सिरे से तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर पंचायत परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग की वेबसाइट पर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के परिसीमन से संबंधित अधिसूचनाएं भी जारी की गई हैं।
राज्य में फिलहाल 8,053 ग्राम पंचायतें हैं। परिसीमन के बाद कई पंचायतों की सीमाओं में बदलाव हो सकता है। कुछ गांव दूसरी पंचायत में शामिल हो सकते हैं, जबकि अधिक आबादी वाले पंचायत क्षेत्रों के विभाजन की संभावना भी है। हालांकि अंतिम तस्वीर पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
1. परिसीमन में क्या बदलेगा?
परिसीमन के दौरान ग्राम पंचायत, वार्ड, पंचायत समिति और जिला परिषद के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से निर्धारित की जाएंगी। इसके लिए जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों और डिजिटल मानचित्रों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने 2011 की जनगणना के आंकड़ों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के मानचित्र और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा कुल आबादी से संबंधित आंकड़े उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
2. आपका गांव दूसरी पंचायत में जा सकता है?
हां, परिसीमन के दौरान ऐसा संभव है। यदि नई सीमा व्यवस्था में किसी गांव को दूसरी पंचायत के भौगोलिक क्षेत्र में शामिल किया जाता है, तो उस गांव की पंचायत बदल सकती है।
इसलिए अभी किसी गांव के पुराने पंचायत क्षेत्र में ही बने रहने की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती।
3. किन पंचायतों में ज्यादा बदलाव की संभावना?
आबादी को परिसीमन का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। सामने आए संभावित प्रारूप में करीब 6 हजार से 8 हजार की आबादी वाली पंचायतों को यथावत रखने का विकल्प बताया गया है।
वहीं बहुत कम या ज्यादा आबादी वाली पंचायतों की सीमाओं में बदलाव की संभावना अधिक है। 12 हजार से 17 हजार आबादी वाले पंचायत क्षेत्र दो हिस्सों में और 18 हजार या उससे अधिक आबादी वाले क्षेत्र तीन हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव चर्चा में रहा है।
4. पंचायतों की संख्या बढ़ सकती है?
परिसीमन के बाद पंचायतों की कुल संख्या में बदलाव की संभावना है। सरकार के सामने आबादी के आधार पर नई पंचायतें बनाने और बड़ी पंचायतों को विभाजित करने के विकल्प हैं।
हालांकि कितनी नई पंचायतें बनेंगी, इसका निश्चित आंकड़ा परिसीमन की अंतिम प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
5. आरक्षण पर भी पड़ेगा असर?
परिसीमन के साथ पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत परिसीमन के साथ आरक्षण से संबंधित दस्तावेज और प्रपत्र भी जारी किए हैं।
इसका मतलब है कि किसी पंचायत या वार्ड की नई सीमा तय होने के बाद संबंधित पद की आरक्षित श्रेणी में भी बदलाव हो सकता है। अंतिम आरक्षण सूची आने तक मौजूदा स्थिति को अंतिम नहीं माना जा सकता।
6. ग्रामीण अपनी आपत्ति दर्ज करा सकेंगे?
परिसीमन की प्रक्रिया में दावा और आपत्ति की व्यवस्था रखी गई है। प्रारंभिक सीमा निर्धारण सामने आने के बाद संबंधित लोग निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी आपत्ति या सुझाव दे सकेंगे।
आयोग की वेबसाइट पर परिसीमन से संबंधित दस्तावेज और प्रक्रिया के अपडेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
7. इस बार किस जनगणना को आधार बनाया जा रहा है?
इस परिसीमन में वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आयोग ने अगस्त 2026 में 2011 की जनगणना से जुड़े गणना ब्लॉक, गांववार आबादी और अन्य आंकड़े उपलब्ध कराने के संबंध में निर्देश जारी किए हैं।
पिछला बड़ा पंचायत परिसीमन 1990 के दशक में हुआ था। अब लंबे अंतराल के बाद नई प्रक्रिया शुरू की गई है।
8. पंचायत चुनाव कब होंगे?
पंचायत चुनाव नई परिसीमन व्यवस्था के आधार पर कराए जाने हैं। मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा होना है। परिसीमन, आरक्षण और अन्य चुनावी तैयारियों के कारण चुनाव कार्यक्रम नई सीमा व्यवस्था के अंतिम रूप लेने के बाद तय होगा।
आपके गांव के लिए सबसे अहम बात
अभी यह तय मानना जल्दबाजी होगी कि आपका गांव किस पंचायत में रहेगा या मुखिया, वार्ड सदस्य अथवा अन्य पद किस श्रेणी के लिए आरक्षित होगा। पहले नई सीमाओं का प्रारूप तैयार होगा, उसके बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होगी और अंत में अंतिम सीमा तथा आरक्षण की स्थिति सामने आएगी।
राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर पंचायत परिसीमन 2026 से जुड़े ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के दस्तावेज उपलब्ध हैं।

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