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गंगा में उफान से बिहार के कई जिलों में बाढ़ का संकट, करीब 1 लाख लोग प्रभावित; खगड़िया में 2 हजार घरों पर खतरा


पटना। बिहार में गंगा नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। नदी किनारे बसे गांवों और बस्तियों में पानी पहुंचने से बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ रहा है। खगड़िया में करीब 2 हजार घरों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, जबकि मुंगेर में कई परिवार सड़क किनारे अस्थायी तंबू लगाकर रहने को मजबूर हैं।

बाढ़ से प्रभावित लोगों के सामने घर छोड़ने के साथ-साथ भोजन, पेयजल और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती भी खड़ी हो गई है। कई स्थानों पर ग्रामीण ऊंचे स्थानों और सड़कों के किनारे शरण ले रहे हैं।

रातोंरात घर में घुसा पानी, सड़क किनारे बनाया आशियाना

मुंगेर के बाढ़ प्रभावित इलाके में रहने वाले एक ग्रामीण ने बताया कि रात में पूरा परिवार घर के अंदर सो रहा था। अचानक नींद खुली तो घर में गंगा का पानी प्रवेश कर चुका था। परिवार ने किसी तरह जरूरी सामान समेटा और घर से निकलकर सड़क किनारे पहुंच गया।

ग्रामीण के मुताबिक, अब सड़क किनारे लगाया गया तंबू ही परिवार का सहारा है। आसपास के करीब 20 से 30 परिवार भी इसी तरह अस्थायी ठिकानों में रह रहे हैं। उनका कहना है कि यदि पानी लंबे समय तक इसी तरह बढ़ता रहा तो उन्हें कई सप्ताह तक सड़क किनारे ही गुजारा करना पड़ सकता है।

खगड़िया में करीब 2 हजार घरों पर खतरा

गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर खगड़िया जिले के नदी किनारे बसे इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। कई गांवों के आसपास पानी पहुंचने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। करीब 2 हजार घरों पर बाढ़ का खतरा बताया जा रहा है।

ग्रामीणों को आशंका है कि जलस्तर में और वृद्धि हुई तो कई घर पूरी तरह जलमग्न हो सकते हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

करीब 1 लाख लोग बाढ़ की चपेट में

गंगा के जलस्तर में वृद्धि का असर बिहार के कई जिलों में देखने को मिल रहा है। विभिन्न इलाकों में करीब 1 लाख लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। नदी के आसपास के निचले क्षेत्रों में पानी फैलने से आवागमन और जनजीवन प्रभावित हुआ है।

कई जगह ग्रामीण रास्तों पर पानी भरने के कारण लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। पशुओं के लिए चारा और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करना भी प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

सड़क और ऊंचे स्थान बने लोगों का सहारा

बाढ़ का पानी घरों में पहुंचने के बाद अनेक परिवार अपने जरूरी सामान के साथ सड़क किनारे या अन्य ऊंचे स्थानों पर पहुंच गए हैं। लोगों ने प्लास्टिक और तिरपाल की मदद से अस्थायी ठिकाने तैयार किए हैं।

प्रभावित परिवारों का कहना है कि पानी कम होने तक इन अस्थायी ठिकानों में ही रहना पड़ सकता है। लंबे समय तक विस्थापन की स्थिति बनी रही तो बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के सामने मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

प्रशासन के सामने राहत पहुंचाने की चुनौती

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन के सामने लोगों तक भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने की चुनौती है। साथ ही जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि हालात बिगड़ने पर लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। प्रभावित परिवार अब पानी कम होने और सामान्य जनजीवन लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

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