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उज्जैन में शिप्रा आरती को लेकर विवाद गहराया, पंडा समिति ने जल सत्याग्रह का किया ऐलान

 

उज्जैन। रामघाट पर होने वाली शिप्रा आरती की व्यवस्था को लेकर पंडा समिति और महाकाल मंदिर समिति के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। 5 अगस्त से शुरू हुआ यह विवाद अब विरोध प्रदर्शन तक पहुंच गया है। पंडा समिति ने शनिवार शाम 4 बजे शिप्रा नदी में उतरकर जल सत्याग्रह करने की घोषणा की है।

पंडा समिति का कहना है कि रामघाट पर पिछले करीब 11 वर्षों से नियमित रूप से शिप्रा आरती कराई जा रही है। दूसरी ओर प्रशासन आरती को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी में है। इसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए हैं।

5 अगस्त को रामघाट पर आमने सामने आए दोनों पक्ष

पंडा समिति के अनुसार, 5 अगस्त को महाकाल मंदिर समिति ने आरती के लिए सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने को लेकर संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा था। इसी दिन शाम करीब 5 बजे मंदिर समिति के बटुक और अन्य लोग रामघाट पहुंचे।

पंडा समिति के सदस्यों ने उन्हें आरती कराने से रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक गतिरोध की स्थिति बनी रही। बाद में मंदिर समिति के बटुकों ने रामघाट पर दूसरे स्थान पर आरती की।

7 अगस्त को पुलिस की मौजूदगी में भी नहीं बनी सहमति

7 अगस्त को एक बार फिर मंदिर समिति के बटुक रामघाट पर आरती के लिए पहुंचे। पंडा समिति के लोगों ने इसका विरोध किया। स्थिति को देखते हुए मौके पर पुलिस बल के साथ दो एसडीएम भी पहुंचे।

अधिकारियों ने दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद पुलिस ने पंडा समिति से जुड़े पुजारियों को वहां से हटाया और मंदिर समिति के बटुकों से दूसरे स्थान पर आरती कराई गई।

पुलिस कार्रवाई के बाद जल सत्याग्रह का फैसला

पंडा समिति ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया है। समिति ने इसी के विरोध में शनिवार शाम 4 बजे शिप्रा नदी में जल सत्याग्रह करने का निर्णय लिया है।

समिति का कहना है कि आरती की परंपरा लंबे समय से तीर्थ पुरोहितों द्वारा निभाई जा रही है और अचानक इसकी जिम्मेदारी बदलना उनके पारंपरिक अधिकारों को प्रभावित करता है।

प्रशासन आरती को भव्य स्वरूप देने की तैयारी में

एसडीएम पवन बारिया के अनुसार, सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को हरिद्वार और बनारस जैसी भव्य आरती का अनुभव कराने के उद्देश्य से नई व्यवस्था शुरू की जा रही है।

उन्होंने कहा कि किसी को हटाने या रोकने का उद्देश्य नहीं है। प्रशासन की ओर से शिप्रा नदी के किनारे आरती को व्यवस्थित और बड़े स्तर पर आयोजित करने की योजना है।

दोनों पक्षों के साथ आरती का प्रस्ताव भी दिया गया

एसडीएम एलएन गर्ग के अनुसार, पंडा समिति के पुरोहितों से मंदिर समिति के बटुकों के साथ मिलकर आरती कराने का प्रस्ताव रखा गया था। प्रशासन की कोशिश थी कि दोनों पक्ष साथ मिलकर आयोजन करें, लेकिन पुरोहित इस व्यवस्था के लिए तैयार नहीं हुए।

प्रशासन की ओर से अब मंदिर समिति के माध्यम से नियमित आरती कराने की बात कही गई है।

पंडा समिति ने जिम्मेदारी बदलने पर जताई आपत्ति

पंडा समिति के राजेश त्रिवेदी ने कहा कि तीर्थ पुरोहित वर्ष 2015 से शिप्रा आरती करा रहे हैं। समय के साथ आरती के स्वरूप में बदलाव कर इसे अधिक व्यवस्थित और आकर्षक बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि इतने वर्षों बाद अचानक आरती की जिम्मेदारी महाकाल मंदिर समिति को देना पुरोहितों को आयोजन से अलग करने जैसा है। समिति ने स्पष्ट किया है कि पुरोहित परंपरा के अनुसार आरती कराते रहेंगे।

अब जल सत्याग्रह पर नजर

शिप्रा आरती को लेकर प्रशासन और पंडा समिति के बीच मतभेद फिलहाल खत्म नहीं हुए हैं। शनिवार शाम प्रस्तावित जल सत्याग्रह के कारण रामघाट और शिप्रा नदी क्षेत्र में प्रशासन की निगरानी बढ़ने की संभावना है। अब सभी की नजर इस विरोध प्रदर्शन और उसके बाद प्रशासन की अगली कार्रवाई पर रहेगी।

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