युवाओं को नशे की दलदल में धकेलने वाले एक बेहद खतरनाक और काले कारोबार का बड़ा पर्दाफाश हुआ है। शहर की गलियों और बंद कमरों में इन दिनों स्मैक और एविल (Avil) के कॉकटेल का जानलेवा इंजेक्शन लिया जा रहा है। यह नशा एमडी (मेफेड्रोन) जैसे महंगे सिंथेटिक ड्रग्स जैसा ही तेज और सिर चढ़कर बोलने वाला असर करता है।
हमारी टीम की विशेष खोजी पड़ताल में इस पूरे काले साम्राज्य की परतें उघड़कर सामने आई हैं। हमारे रिपोर्टर ने खुद को एक पुराना नशेड़ी बताकर इस सिंडिकेट के सप्लायरों तक पहुंच बनाई। इस स्टिंग ऑपरेशन और पड़ताल में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। इस जहरीले सिंडिकेट को चलाने वाले नेटवर्क में एक प्रैक्टिसिंग डॉक्टर और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष का बेटा भी सीधे तौर पर शामिल पाया गया है।
1. स्टिंग ऑपरेशन: खुद को नशेड़ी बताकर सप्लायरों के अड्डे तक पहुंचा रिपोर्टर
इस सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने के लिए रिपोर्टर ने अपनी पहचान छिपाई और खुद को एक गंभीर नशेड़ी बताकर सप्लायरों के गुप्त ठिकाने पर पहुंचा। काफी मशक्कत और स्थानीय बिचौलियों का भरोसा जीतने के बाद रिपोर्टर को उस मुख्य अड्डे तक एंट्री मिली जहाँ यह कॉकटेल इंजेक्शन तैयार करके बेचा जाता है।
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खुलेआम चल रहा था सौदा: एक संकरी गली के कोने में स्थित ठिकाने पर दिन-रात युवाओं की आवाजाही लगी हुई थी। सप्लायरों के पास पहले से सीरिंज, स्मैक की पुड़िया और एविल की एम्पुल (कांच की शीशी) तैयार रखी थी।
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चंद मिनटों में तैयार होता है कॉकटेल: रिपोर्टर के सामने ही सप्लायर ने स्मैक के पाउडर को लिक्विड में घोला और उसमें एविल का इंजेक्शन मिलाकर सिरिंज में भर दिया। इस एक घातक डोज के लिए 500 से 800 रुपये तक वसूले जा रहे थे।
2. स्मैक प्लस एविल: क्यों लिया जा रहा है यह कॉकटेल इंजेक्शन?
नशे के सौदागरों ने कम पैसों में ज्यादा और तुरंत चढ़ने वाले नशे का यह शॉर्टकट फॉर्मूला तैयार किया है। साधारण तौर पर स्मैक को जलाकर या धुएं के रूप में लिया जाता है, जिसका असर धीरे-धीरे होता है। लेकिन जब स्मैक के पाउडर को पानी में घोलकर उसमें एंटी-एलर्जिक दवा 'एविल' मिलाई जाती है, तो यह सीधा नसों (Veins) में काम करता है।
एविल दवा शरीर में जाकर स्मैक के असर को कई गुना बढ़ा देती है। इसे नसों में इंजेक्ट करते ही नशा सीधे दिमाग पर अटैक करता है, जिससे एमडी (Mephedrone) या हेरोइन जैसा तत्काल और भारी 'किक' मिलता है। यही वजह है कि युवा बहुत तेजी से इस कॉकटेल के जाल में फंसते चले जा रहे हैं।
3. नेटवर्क में डॉक्टर और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष के बेटे का कनेक्शन
इस अवैध कारोबार की सबसे काली और डरावनी सच्चाई यह है कि इसे चलाने में समाज के प्रतिष्ठित और रसूखदार चेहरे शामिल हैं। पड़ताल के दौरान सामने आया कि:
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डॉक्टर की भूमिका: इस सिंडिकेट में शामिल एक डॉक्टर अपने क्लीनिक और मेडिकल संपर्कों की आड़ में एविल इंजेक्शन, डिस्पोजेबल सीरिंज और प्रतिबंधित दवाएं भारी मात्रा में उपलब्ध करा रहा है। डॉक्टर का काम नशे के सौदागरों को कानूनी शिकंजे से बचाना और भारी मात्रा में मेडिकल सप्लाई की आड़ में ये एम्पुल मुहैया कराना है।
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पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष का बेटा: राजनीतिक रसूख रखने वाले पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष का बेटा इस पूरे नेटवर्क का फाइनेंस और मुख्य डिस्ट्रीब्यूशन संभाल रहा है। अपने पिता के राजनीतिक प्रभाव और पुलिस में सांठगांठ के दम पर वह सप्लायरों को बैकअप देता है और माल की सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित करवाता है।
4. मेडिकल स्टोरों पर बिना प्रिस्क्रिप्शन धड़ल्ले से बिक रही हैं प्रतिबंधित एम्पुल
नियमों के अनुसार, एविल और सिरिंज बिना डॉक्टर की लिखित पर्ची (Prescription) के बेचना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। लेकिन इस पड़ताल में देखा गया कि शहर के कई प्रमुख मेडिकल स्टोरों पर यह साठगांठ खुलेआम चल रही है।
नशेड़ी और सप्लायर बिना किसी डॉक्टर के पर्चे के एक बार में दर्जनों एविल के इंजेक्शन और डिस्पोजेबल नीडल खरीद रहे हैं। मेडिकल स्टोर संचालक चंद रुपयों के मुनाफे के चक्कर में इन जानलेवा रसायनों को खुले बाजार में बेचकर इस सिंडिकेट को फलने-फूलने में मदद कर रहे हैं।
5. कितना जानलेवा है यह कॉकटेल: डॉक्टरों की गंभीर चेतावनी
चिकित्सा विशेषज्ञों और न्यूरोलॉजिस्ट का कहना है कि नसों में स्मैक और एविल का सीधा इंजेक्शन लेना खुदकुशी करने के बराबर है। इसके दुष्परिणाम बेहद भयावह हैं:
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नसों का सड़ना और ब्लॉक होना: अशुद्ध स्मैक और केमिकल का सीधा खून में जाना नसों को अंदर से पूरी तरह ब्लॉक कर देता है। कई मामलों में हाथ-पैर की नसें सड़ जाती हैं और उन्हें काटना पड़ता है।
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हार्ट अटैक और ओवरडोज का खतरा: एविल और स्मैक का मिश्रण दिल की धड़कन को अचानक अनियंत्रित कर देता है, जिससे अचानक कार्डियक अरेस्ट या ओवरडोज से मौके पर ही मौत हो सकती है।
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एचआईवी और हेपेटाइटिस का फैलाव: एक ही सिरिंज से कई नशेड़ी बारी-बारी से इंजेक्शन लेते हैं, जिससे एचआईवी (HIV) और हेपेटाइटिस-बी तथा सी जैसी जानलेवा बीमारियों के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
6. पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के उजागर होने के बाद स्थानीय पुलिस, नारकोटिक्स सेल और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर कैसे शहर के बीचों-बीच इतना बड़ा कॉकटेल नशा सिंडिकेट चल रहा है और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी?
आम जनता और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इस मामले में सामने आए डॉक्टर और राजनीतिक रसूखदार के बेटे के खिलाफ तत्काल मामला दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, साथ ही बिना पर्ची के एविल बेचने वाले मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएं।

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