सरकारी मुद्रणालय (प्रिंटिंग प्रेस) में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहे एक बेहद शातिराना और बड़े घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है। सरकारी संपत्ति को ठिकाने लगाकर विभागीय खजाने को चूना लगाने का ऐसा मामला सामने आया है जिसने समूचे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकारी प्रेस से नीलामी के लिए बाहर भेजी गई 29.7 टन रद्दी (वेस्ट पेपर) को फाइलों में हेरफेर करके महज 6.82 टन दर्शाया गया। इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए अधिकारियों ने न केवल धर्मकांटे की तौल पर्चियों में कूटरचना की, बल्कि जांच से बचने के लिए माल ढोने वाले ट्रक की पहचान और लोकेशन तक बदल दी।
इस घपले का खुलासा होने के बाद शासन स्तर पर उच्चस्तरीय जांच बैठा दी गई है और जिम्मेदार अफसरों पर बड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
1. कागजी हेरफेर से गायब कर दी गई 22.88 टन रद्दी
सरकारी मुद्रणालय में विभिन्न सरकारी विभागों के लिए कागजातों, रजिस्टरों, पुस्तकों और प्रारूपों की छपाई का काम होता है। इस प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में कतरन और रद्दी कागज जमा होता है। नियमानुसार, इस रद्दी को एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नीलाम किया जाता है और वजन के आधार पर ठेकेदार से सरकारी खजाने में राशि जमा कराई जाती है।
लेकिन इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों ने निजी ठेकेदार के साथ मिलकर एक सुव्यवस्थित आपराधिक षड्यंत्र रचा:
-
वास्तविक वजन: मुद्रणालय से जो ट्रक लोड होकर बाहर निकला, उसमें कुल 29.7 टन (29,700 किलोग्राम) रद्दी भरी हुई थी।
-
फाइलों में दर्ज वजन: जब इस खेप की आधिकारिक एंट्री फाइलों में की गई, तो उसे घटाकर केवल 6.82 टन (6,820 किलोग्राम) दिखाया गया।
-
सीधा नुकसान: अधिकारियों ने एक ही झटके में लगभग 22.88 टन रद्दी कागजों पर ही 'गायब' कर दी। बाजार भाव के हिसाब से इस गायब की गई रद्दी की कीमत लाखों रुपये में बताई जा रही है, जिसे मिलीभगत करके आपस में बांट लिया गया।
2. ऐसे रचा गया फर्जीवाड़े का पूरा जाल: फर्जी पर्चियां और फर्जी ट्रक एंट्री
जांच दल द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार, इस पूरे घोटाले को छुपाने के लिए कई स्तरों पर जालसाजी की गई थी:
-
धर्मकांटे की पर्ची में हेरफेर: ट्रक में रद्दी लोड होने के बाद उसका वास्तविक वजन एक पंजीकृत धर्मकांटे पर कराया गया था। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में लगाने के लिए एक फर्जी धर्मकांटा पर्ची तैयार करवाई गई, जिस पर वजन की संख्या को बदल दिया गया था।
-
गेट पास और टाइमिंग का खेल: प्रेस के मुख्य द्वार पर स्थित सुरक्षा रजिस्टर में भी टाइमिंग और वजन की गलत प्रविष्टियां की गईं। सुरक्षा कर्मियों और स्टोर इनचार्ज की सहमति से फर्जी गेट पास जारी किया गया।
-
ट्रक का नंबर और लोकेशन बदली गई: किसी भी प्रकार के औचक निरीक्षण या जीपीएस ट्रैकिंग से बचने के लिए फाइलों में जिस ट्रक का नंबर दर्ज किया गया था, वास्तव में माल किसी दूसरे ट्रक से रवाना किया गया था। ताकि यदि कोई जांच अधिकारी सड़क पर वाहन की पड़ताल करे, तो कागजों में दर्शाया गया ट्रक मौके पर मिले ही नहीं।
3. आंतरिक ऑडिट और सीसीटीवी फुटेज से खुला घपले का राज
इस बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा तब हुआ जब विभाग में वार्षिक ऑडिट और सामग्री के भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) की प्रक्रिया शुरू की गई। ऑडिट टीम ने पाया कि मुद्रणालय में आए कुल कच्चे कागज (रॉ पेपर) और उससे तैयार हुई सरकारी सामग्री के अनुपात में रद्दी की मात्रा अत्यधिक कम दर्ज की गई थी।
संदेह गहराने पर विशेष जांच दल का गठन किया गया। जांच टीम ने जब प्रेस परिसर और मुख्य गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तो पूरी कहानी सामने आ गई:
-
फुटेज में खुला राज: कैमरों में साफ देखा गया कि रद्दी से पूरी तरह लदा हुआ भारी ट्रक मुख्य द्वार से बाहर निकल रहा है। ट्रक के टायरों के दबाव और बॉडी के फैलाव से साफ पता चल रहा था कि उसमें क्षमता से अधिक माल लोड था।
-
संदेह की पुष्टि: जब उस तिथि की वजन पर्ची और सीसीटीवी फुटेज का मिलान किया गया, तो दर्ज 6.82 टन का आंकड़ा पूरी तरह झूठा साबित हुआ, क्योंकि उतना कम वजन का माल बिल्कुल अलग दिखता है।
4. वरिष्ठ अफसरों समेत निजी ठेकेदार पर एफआईआर की तैयारी
सरकारी प्रेस में उजागर हुए इस बड़े घोटाले के बाद शासन स्तर पर कड़ा रुख अपनाया गया है। प्राथमिक जांच में मुद्रणालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों, स्टोर इंचार्ज, अकाउंटेंट और संबंधित ठेकेदार की सीधी मिलीभगत और आपराधिक संलिप्तता पाई गई है।
संभावित और कड़े कदम:
-
आपराधिक मामला दर्ज: सरकारी धन के गबन, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के गंभीर आरोपों में संबंधित पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।
-
निलंबन और विभागीय जांच: संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) शुरू की जा रही है।
-
पुराने रिकॉर्ड्स की री-ऑडिटिंग: इस घटना के सामने आने के बाद पिछले तीन वर्षों के दौरान हुई रद्दी की सभी नीलामियों और स्क्रैप बिक्री की फाइलों को दोबारा खंगालने का निर्णय लिया गया है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि यह खेल कितने लंबे समय से चल रहा था।

✍️ प्रतिक्रिया दें (Leave a Comment)