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ग्वालियर में 45 लाख की बड़ी धोखाधड़ी: फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने हड़पे पैसे, ग्राहकों को थमाई फर्जी रसीदें; 40 वाहन भी बेचे


मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से धोखाधड़ी और ठगी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक नामी फाइनेंस कंपनी में काम करने वाले दो कर्मचारियों ने कंपनी और आम ग्राहकों, दोनों को लाखों रुपये का चूना लगा दिया। आरोपियों ने ग्राहकों से लोन की किश्तें तो पूरी वसूल लीं, लेकिन उस पैसे को कंपनी के खाते में जमा करने के बजाय अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिया।

मामला सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी (विश्वविद्यालय) थाना पुलिस ने कंपनी प्रबंधन की शिकायत पर दोनों पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।

कैसे हुआ 45 लाख रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा?

यह पूरा मामला आरबीआई फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड (RBI Finance Pvt Ltd) फर्म का है। आगरा के रहने वाले जितेंद्र गर्ग ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। कंपनी में जावेद खान (क्रेडिट एंड कलेक्शन ऑफिसर) और आकिब खान (सेल्स एंड कलेक्शन ऑफिसर) के पद पर तैनात थे।

मामले की शुरुआत तब हुई जब कुछ ग्राहकों ने कंपनी से शिकायत की कि वे हर महीने समय पर अपनी किश्त जमा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कंपनी की ओर से आधिकारिक (ओरिजिनल) रसीद नहीं मिल रही है।

ग्राहकों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जब कंपनी ने अंदरूनी जांच और ऑडिट करवाया, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। जांच में पता चला कि दोनों कर्मचारियों ने मिलकर करीब 75 लोन खाताधारकों से नकद (कैश) और ऑनलाइन माध्यम से किश्तों का पैसा वसूला था, लेकिन उसे कंपनी के पास जमा ही नहीं किया।

फर्जी रसीदें और फर्जी लोन स्टेटमेंट देकर जीता भरोसा

ग्राहकों को किसी भी तरह का शक न हो, इसके लिए दोनों आरोपी बेहद शातिराना तरीके से काम कर रहे थे। वे ग्राहकों को कंपनी के नाम की फर्जी रसीदें और फर्जी लोन स्टेटमेंट बनाकर दे देते थे। ग्राहक यही समझते रहे कि उनकी किश्त जमा हो रही है, जबकि उनका पैसा कर्मचारियों के निजी खातों में जा रहा था। इस पूरी हेराफेरी से कंपनी को करीब 45 लाख रुपये का सीधा नुकसान हुआ है।

नौकरी से निकाले जाने के बाद भी जारी रखी वसूली

ऑडिट रिपोर्ट में गड़बड़ी साबित होने के बाद कंपनी ने 14 अप्रैल को जावेद खान को नौकरी से निकाल दिया। वहीं कार्रवाई के डर से आकिब खान ने 23 अप्रैल को अपना इस्तीफा भेजा, जिसे कंपनी ने मंजूर नहीं किया।

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि नौकरी से हटाए जाने के बाद भी दोनों आरोपियों की हिम्मत कम नहीं हुई। वे लगातार ग्राहकों से संपर्क करके किश्तों की वसूली करते रहे। इतना ही नहीं, उन्होंने कई ग्राहकों की लोन फाइलें और ब्लैंक चेक भी अपने पास कब्जे में दबाकर रख लिए।

पार्किंग यार्ड में खड़े 40 ऑटो (थ्री-व्हीलर) भी बेच डाले

इस फर्जीवाड़े में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। कंपनी का आरोप है कि दोनों आरोपियों ने सिर्फ किश्तों के पैसों की ही हेराफेरी नहीं की, बल्कि कंपनी के पार्किंग यार्ड में खड़े 40 सरेंडर किए गए थ्री-व्हीलर (ऑटो/रिक्शा) वाहनों को भी चुपचाप बेच दिया और उसका पैसा भी खुद आपस में बांट लिया।

जब धोखाधड़ी का दायरा काफी बड़ा निकला, तो कंपनी प्रबंधन ने बिना देर किए विश्वविद्यालय थाने पहुंचकर पूरी रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस खेल में उनके साथ कोई और तो शामिल नहीं था और हड़पे गए 45 लाख रुपये कहाँ ट्रांसफर किए गए हैं।

ग्राहकों के लिए जरूरी सीख

अगर आप भी किसी फाइनेंस कंपनी या बैंक से लोन की किश्त जमा करते हैं, तो हमेशा कंपनी के अधिकृत (Official) ऐप, बैंक खाते या सीधे ब्रांच में जाकर ही भुगतान करें। किसी भी कर्मचारी को व्यक्तिगत खाते में पैसे ट्रांसफर न करें और किश्त जमा करते ही अपने मोबाइल पर आने वाले आधिकारिक मैसेज व रसीद की जांच जरूर करें।

क्या आपके साथ भी कभी बैंक या लोन की किश्त को लेकर कोई गड़बड़ी हुई है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय और अनुभव जरूर शेयर करें!

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