नगर निगम में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ जमीन का म्यूटेशन (नामांतरण) करने के नाम पर पीड़ित से खुलेआम 90 हजार रुपये की घूस मांगी जा रही थी। पीड़ित की सतर्कता के कारण रिश्वत मांगने का यह पूरा वाकया कैमरे में कैद हो गया।
वीडियो के माध्यम से जैसे ही यह खबर सार्वजनिक रूप से पब्लिश हुई, प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। खबर के प्रकाशित होने के महज 4 घंटे के भीतर नगर निगम प्रशासन ने त्वरित और कड़ा एक्शन लेते हुए आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई और उनमें से 2 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
1. नामांतरण की एवज में 90 हजार रुपये की मोटी घूस का खेल
यह पूरा मामला नगर निगम के जोनल कार्यालय का है, जहाँ एक नागरिक अपनी खरीदी गई संपत्ति का आधिकारिक नामांतरण यानी म्यूटेशन करवाने के लिए पिछले कई महीनों से चक्कर काट रहा था। सभी जरूरी कानूनी दस्तावेज और आवेदन पूरे होने के बावजूद संबंधित फाइल को जानबूझकर लटकाया जा रहा था।
जब पीड़ित ने म्यूटेशन की फाइल आगे बढ़ाने की गुहार लगाई, तो नगर निगम के कर्मचारियों ने काम पूरा करने के एवज में 90 हजार रुपये की सीधी रिश्वत की डिमांड रख दी। कर्मचारियों का साफ कहना था कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी, तब तक फाइल टेबल से आगे नहीं बढ़ेगी।
2. पीड़ित ने सूझबूझ से बनाया वीडियो, कैमरे में कैद हुई रिश्वत की मांग
बार-बार चक्कर काटने और अनुचित मांग से परेशान होकर पीड़ित ने भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने की ठानी। उसने अपने मोबाइल कैमरे को चालू रखा और कर्मचारियों के पास बातचीत करने पहुंच गया।
कैमरे के सामने कर्मचारियों ने बेझिझक 90 हजार रुपये की रिश्वत की बात स्वीकार की और एडवांस रकम जमा करने का दबाव बनाने लगे। बातचीत के दौरान यह भी साफ हो गया कि इस घूस की रकम में ऊपर से लेकर नीचे तक कई कर्मचारियों और अधिकारियों का हिस्सा तय था। यह पूरा वीडियो सबूत के तौर पर रिकॉर्ड हो गया।
3. खबर प्रकाशित होने के मात्र 4 घंटे के भीतर हिल गया पूरा प्रशासन
वीडियो सामने आने के बाद जैसे ही इस भ्रष्टाचार की खबर मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पब्लिश हुई, प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैल गई। उच्च अधिकारियों तक बात पहुंचते ही पूरे नगर निगम महकमे में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
मामले की संवेदनशीलता और पक्के सबूतों को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत कड़े कदम उठाने पड़े। खबर छपने के मात्र 4 घंटे के भीतर नगर निगम आयुक्त ने आपातकालीन आदेश जारी करते हुए भ्रष्टाचार में सीधे संलिप्त 2 स्थायी कर्मचारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही संविदा पर कार्यरत एक अन्य कर्मचारी की सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
4. पुलिस थाने में आपराधिक मामला दर्ज, जांच शुरू
प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करने के साथ-साथ नगर निगम की आधिकारिक शिकायत के आधार पर संबंधित थाने में तीनों कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है।
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गंभीर धाराओं में केस दर्ज: आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और गबन की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
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फाइल हुई पास और जांच के आदेश: जिस नामांतरण फाइल को रोककर रिश्वत मांगी जा रही थी, उसे नियमानुसार तुरंत स्वीकृत कर दिया गया है। इसके अलावा जोनल कार्यालय की अन्य पेंडिंग फाइलों की भी ऑडिट कराने के आदेश दिए गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन कर्मचारियों ने पहले कितने लोगों को अपना शिकार बनाया था।

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