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कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई एक हफ्ते टली, तमिलनाडु ने कर्नाटक से पानी छोड़ने की मांग की

नई दिल्ली। कावेरी जल विवाद से जुड़ी तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई एक सप्ताह के लिए टल गई। तमिलनाडु ने अदालत से कर्नाटक को राज्य के हिस्से का कावेरी पानी तत्काल छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है। अब मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होने की संभावना है।

तमिलनाडु सरकार ने 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कावेरी जल विनियमन समिति की ओर से तमिलनाडु के लिए निर्धारित पानी की मात्रा के मुकाबले कर्नाटक की ओर से छोड़ा जा रहा पानी काफी कम है। राज्य सरकार ने अदालत से निर्धारित मात्रा में पानी उपलब्ध कराने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

3 अगस्त को दाखिल की गई थी याचिका

तमिलनाडु सरकार की ओर से 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इसके बाद 12 अगस्त को अदालत ने कहा था कि तमिलनाडु सरकार और मामले से जुड़े अन्य पक्षों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर 17 अगस्त को सुनवाई की जाएगी।

सोमवार को सुनवाई टलने के बाद अब इस विवाद पर अदालत में अगले सप्ताह सुनवाई होगी। इस दौरान दोनों राज्यों की ओर से कावेरी नदी के पानी के बंटवारे और उपलब्ध जल की स्थिति से जुड़े तर्क रखे जा सकते हैं।

तमिलनाडु ने पानी की कम आपूर्ति का दावा किया

तमिलनाडु सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि कावेरी जल विनियमन समिति द्वारा राज्य के लिए तय की गई पानी की मात्रा के अनुरूप उसे पानी नहीं मिल रहा है। सरकार का दावा है कि कर्नाटक की ओर से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा निर्धारित स्तर से काफी कम है।

राज्य सरकार ने अदालत के सामने पानी के प्रवाह से जुड़े आंकड़े भी रखे हैं। उसके अनुसार 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच बिलिगुंडुलु में कावेरी नदी के पानी का प्रवाह 158 से 550 क्यूसेक के बीच रहा। तमिलनाडु का कहना है कि यह मात्रा निर्धारित पानी की तुलना में काफी कम है।

28 जुलाई की बैठक में 3500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश

कावेरी जल विनियमन समिति की 28 जुलाई को हुई बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से लगातार 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था।

तमिलनाडु सरकार का कहना है कि समिति के निर्देश के बावजूद राज्य तक निर्धारित मात्रा में पानी नहीं पहुंचा। इसी आधार पर उसने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने और कर्नाटक को तय मात्रा में पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है।

कर्नाटक के जलाशयों में पानी की उपलब्धता का मुद्दा

तमिलनाडु सरकार ने अपनी याचिका में कर्नाटक के प्रमुख जलाशयों में उपलब्ध पानी का भी उल्लेख किया है। राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक 3 अगस्त तक कर्नाटक के काबिनी, हरंगी और हेमावती जलाशयों में कुल 77.537 टीएमसी पानी जमा था।

तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि कर्नाटक के जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के कारण राज्य के हिस्से का पानी जारी करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसी आधार पर तमिलनाडु ने अपने हिस्से के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से विवाद

कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। बारिश और जलाशयों में पानी की उपलब्धता के अनुसार दोनों राज्यों के बीच पानी छोड़ने को लेकर समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं।

कावेरी का पानी दोनों राज्यों के लिए कृषि और पेयजल जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। मानसून के दौरान जलाशयों में पानी की स्थिति बदलने के साथ ही नदी के प्रवाह और पानी छोड़ने को लेकर विवाद भी बढ़ जाता है।

अब अगले सप्ताह होगी सुनवाई

सोमवार को सुनवाई एक सप्ताह के लिए टलने के बाद अब मामले पर अदालत का अगला रुख महत्वपूर्ण रहेगा। तमिलनाडु सरकार अपने हिस्से के पानी की मांग को लेकर अदालत के सामने आंकड़े और तर्क रखेगी। वहीं कर्नाटक की ओर से भी पानी की उपलब्धता, जलाशयों की स्थिति और राज्य की जरूरतों से जुड़े पक्ष रखे जाने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि अदालत दोनों राज्यों के बीच पानी के प्रवाह को लेकर क्या निर्देश देती है। फिलहाल तमिलनाडु अपने निर्धारित हिस्से के पानी की तत्काल आपूर्ति की मांग पर कायम है।

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