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आर्टिकल 370 निरस्त होने के 7 साल: पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा का अभेद्य घेरा, अमरनाथ यात्रा अस्थायी रूप से रोकी गई और राजनीतिक हलचल तेज


जम्मू और कश्मीर से विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के आज पूरे सात वर्ष पूरे हो चुके हैं। 5 अगस्त के इस दिन को देखते हुए पूरे केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा और चुस्त-दुरुस्त कर दिया गया है। श्रीनगर, कुलगाम, शुपियां और पहलगाम सहित सभी संवेदनशील जिलों और इलाकों में बहुस्तरीय (मल्टी लेयर) सुरक्षा घेरा बनाया गया है ताकि शांति व्यवस्था भंग न हो सके।

इसके साथ ही, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों से जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षाबलों के काफिलों की आवाजाही को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

अधिकारियों ने सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से पवित्र अमरनाथ यात्रा को भी एक दिन के लिए स्थगित करने का फैसला लिया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने रामबन जिले में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर विशेष और सघन तलाशी अभियान चलाया, जबकि कुलगाम पुलिस ने एनएच-44 पर आने-जाने वाली सभी छोटी-बड़ी गाड़ियों की चेकिंग और यात्रियों के पहचान पत्रों की जांच प्रक्रिया को तेज कर दिया है।

प्रशासन की ओर से सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि बिना किसी पूर्व लिखित अनुमति के किसी भी प्रकार की जनसभा, रैली, जुलूस या धरने का आयोजन नहीं किया जा सकेगा।

विपक्षी दलों की लामबंदी और विरोध: 'ब्लैक डे' के रूप में मना रहे विपक्ष

दूसरी तरफ, जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विपक्षी पार्टियां इस दिन का कड़ा विरोध कर रही हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) समेत कई प्रमुख राजनीतिक दल इस दिन को 'ब्लैक डे' (काला दिवस) के तौर पर मना रहे हैं।

पीपीडी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विरोध दर्ज कराने के उद्देश्य से अपने समर्थकों के साथ कैंडल मार्च निकाला। उन्होंने आम जनता से भी इस फैसले के खिलाफ अपना शांतिपूर्ण विरोध जताने की अपील की है। विपक्षी दल केंद्र सरकार के फैसले का लगातार विरोध करते हुए जम्मू-कश्मीर को उसका विशेष दर्जा (अनुच्छेद 370) और पूर्ण राज्य का दर्जा वापस बहाल करने की पुरजोर मांग उठा रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर पुलिस की एडवाइजरी: नियमों के उल्लंघन पर होगी कठोर कानूनी कार्रवाई

क्षेत्र में किसी भी संभावित तनाव, राजनीतिक प्रदर्शनों और हालिया आतंकवादी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रशासन ने आम जनता के लिए एक विशेष सार्वजनिक चेतावनी (एडवाइजरी) जारी की है।

इस एडवाइजरी के अंतर्गत स्पष्ट किया गया है कि बिना आधिकारिक स्वीकृति के किसी भी तरह का सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन करने वाले तत्वों और उपद्रवियों के खिलाफ पुलिस सख्त कानूनी धाराओं में मामला दर्ज करेगी।

संवेदनशील इलाकों और भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (LoC) से सटे सीमावर्ती गांवों में सुरक्षाबलों ने देर रात तक फ्लैग मार्च किया ताकि स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा का अहसास कराया जा सके। नियंत्रण रेखा के पार से होने वाली किसी भी घुसपैठ को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही, पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखने में सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें।

महबूबा मुफ्ती पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी: राष्ट्रध्वज के अपमान का आरोप

जम्मू-कश्मीर पुलिस पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती के खिलाफ कानूनी कदम उठाने पर विचार कर रही है। आरोप है कि मंगलवार को आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने भारत के राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) को उल्टा पकड़ा था।

भारतीय ध्वज संहिता (फ्लैग कोड ऑफ इंडिया) के नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज को किसी भी गलत तरीके से प्रदर्शित करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। नियमों के मुताबिक:

  • तिरंगे की सबसे ऊपरी पट्टी हमेशा केसरिया रंग की होनी चाहिए।

  • बीच की सफेद पट्टी पर 24 तीलियों वाला गहरा नीला अशोक चक्र होना अनिवार्य है।

  • सबसे निचली पट्टी का रंग हरा होना चाहिए।

ध्वज को उल्टा पकड़ना, क्षतिग्रस्त कपड़ा इस्तेमाल करना या गलत अनुपात में प्रदर्शित करना राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के दायरे में आता है, जिसके तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

अनुच्छेद 370 का इतिहास: 2019 का फैसला और सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की मुहर

केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया था।

इस फैसले की वैधता को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई थी। लगभग 4 साल, 4 महीने और 6 दिन की लंबी सुनवाई और अध्ययन के बाद, 11 दिसंबर 2023 को उच्चतम न्यायालय की 5 जजों की संविधान पीठ ने अपना 476 पन्नों का ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

शीर्ष अदालत ने अपने सर्वसम्मति के फैसले में स्पष्ट किया:

  1. राष्ट्रपति का आदेश वैध: अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के लिए जारी किया गया राष्ट्रपति का आदेश कानूनी रूप से पूरी तरह वैध और संवैधानिक था।

  2. लद्दाख का गठन सही: लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने के केंद्र सरकार के फैसले की वैधता को अदालत ने बरकरार रखा।

  3. अस्थायी प्रावधान: अदालत ने माना कि अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 और 370 से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक अटूट और अभिन्न अंग है, इसलिए भारतीय संविधान के सभी नियम और प्रावधान वहां समान रूप से लागू होते हैं।

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