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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर 20 प्रतिशत टैक्स लगाने का फैसला 24 घंटे के भीतर ही वापस लिया: खाड़ी देशों से नई ट्रेड डील के बाद बदला फैसला, ईरान ने कसा था तंज


अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भू-राजनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत का भारी-भरकम टैक्स या शुल्क वसूलने की अपनी घोषणा को मात्र 24 घंटे के भीतर ही पूरी तरह से पलट दिया है।

इस यू-टर्न के बाद अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि इस प्रस्तावित टैक्स शुल्क के बजाय अब खाड़ी देशों के साथ बड़े व्यापारिक और निवेश समझौते (Trade and Investment Deals) किए जाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जिसमें तेहरान की तरफ से भी इस पर तीखे और तंज भरे बयान सामने आए थे।

1. महज 24 घंटे में पलटे अमेरिकी राष्ट्रपति, टैक्स का फैसला लिया वापस

महत्वपूर्ण जलमार्गों पर नियंत्रण और नौवहन सुरक्षा को लेकर अमेरिकी प्रशासन लगातार सख्त फैसले ले रहा था। इसी कड़ी में कुछ समय पहले यह घोषणा की गई थी कि होर्मुज मार्ग से होकर गुजरने वाले सभी प्रकार के कार्गो और जहाजों पर 20 प्रतिशत का प्रतिपूर्ति शुल्क (Reimbursement Fee) लगाया जाएगा।

लेकिन इस घोषणा के ठीक एक दिन बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी दी कि उन्होंने इस फैसले को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस अचानक आए बदलाव ने राजनीतिक गलियारों में सबको हैरान कर दिया है।


 

2. खाड़ी देशों के नेताओं से बातचीत और नए ट्रेड समझौतों का दिया हवाला


अपने इस फैसले को बदलते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व के विभिन्न देशों के शीर्ष नेताओं, राजाओं और अमीरों के साथ हुई उत्पादक वार्ताओं के बाद यह नया रुख अपनाया गया है।


 

  • निवेश समझौतों पर बनी सहमति: अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, 20 प्रतिशत टैक्स वसूलने के पुराने विचार को अब हटा दिया गया है। इसके स्थान पर खाड़ी देशों के सहयोग से अमेरिका में बड़े पैमाने पर नए व्यापारिक और निवेश समझौते किए जाएंगे।


     

  • कूटनीतिक दबाव और कड़े विकल्प: जानकारों का मानना है कि इस मार्ग से जुड़े क्षेत्रीय देशों के विरोध और कूटनीतिक वार्ताओं के दबाव के चलते अमेरिका को अपने इस आर्थिक फैसले से पीछे हटना पड़ा है।


     

3. ईरान की तरफ से कसा गया था तंज और उड़ाई गई थी खिल्ली


अमेरिकी प्रशासन के इस प्रकार के प्रस्तावों और बदलते रुख पर ईरान की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं और तंज कसे गए थे। ईरानी अधिकारियों और वहां के मीडिया ने अमेरिकी नीतियों की खिल्ली उड़ाते हुए कहा था कि इस तरह के एकतरफा और अव्यवहारिक फैसलों से क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ता है।


 

ईरान के रणनीतिकारों ने तंज कसते हुए यह तक कह दिया था कि यदि ऐसे शुल्क लगाए गए, तो जलमार्ग के समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे और इसका माकूल जवाब दिया जाएगा। तेहरान लगातार यह दावा करता रहा है कि इस अहम मार्ग पर पारंपरिक और क्षेत्रीय अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।


 

4. वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग कंपनियों के लिए बड़ी राहत

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की एक बहुत बड़ी खेप गुजरती है।


 

  • आर्थिक भार टला: यदि 20 प्रतिशत का यह टैक्स लागू हो जाता, तो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और तेल आयात करने वाले देशों पर अरबों डॉलर का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ जाता। इससे दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें आसमान छूने लगतीं।


     

  • राहत की सांस: अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा इस फैसले को वापस लिए जाने के बाद वैश्विक व्यापारिक और शिपिंग जगत ने राहत की सांस ली है, हालांकि क्षेत्र में कूटनीतिक और सैन्य तनाव अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।


     

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