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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी, कहा- ईरान नहीं सुधरा तो उसका अस्तित्व नहीं बचेगा; अमेरिका ने किए 10 सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमले, जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में बनाए अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना

मेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव अब बेहद खतरनाक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान सरकार को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान ने अपनी हरकतों में सुधार नहीं किया और समुद्री मार्गों तथा क्षेत्रीय शांति को खतरे में डालना बंद नहीं किया, तो उसका अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

 

इस बड़ी चेतावनी के साथ ही अमेरिकी सेना ने अपनी कार्रवाई को तेज करते हुए ईरान के भीतर कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों और ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद से खाड़ी देशों में भारी तनाव और युद्ध का खतरा गहरा गया है।

 

1. राष्ट्रपति ट्रंप की कड़ी चेतावनी, ईरान का अस्तित्व मिटाने की बात कही

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों और व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों के बाद ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका अब लंबे समय तक ऐसी उकसावे वाली कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेगा।

  • कड़ा संदेश: राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे और अमेरिका को अपनी सैन्य कार्रवाई फिर से बड़े पैमाने पर शुरू करनी पड़ी, तो ईरान का वजूद नक्शे से मिट सकता है।


    समझौते की उम्मीदों को झटका: दोनों देशों के बीच पहले बने संघर्ष विराम के हालात अब पूरी तरह खत्म हो चुके हैं और दोनों तरफ से सेनाओं को खुली छूट दे दी गई है।

     

2. अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर की बमबारी, सैन्य क्षमता को पहुंचाया नुकसान

अमेरिकी केंद्रीय कमान की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने आक्रामक कदम उठाते हुए ईरान के कई रणनीतिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

  • प्रमुख ठिकाने तबाह: अमेरिकी हमलों में ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, रडार सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने वाले ठिकाने तथा वायु रक्षा प्रणालियों (एयर डिफेंस सिस्टम) को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।

     

  • नौवहन सुरक्षा का हवाला: अमेरिका का कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करने तथा ईरान की आक्रामक गतिविधियों को रोकने के लिए जरूरी हो गई थी।


     

3. ईरान का पलटवार, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले

अमेरिका की तरफ से लगातार मिल रहे सैन्य हमलों के जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • खाड़ी देशों में बने अमेरिकी अड्डों पर प्रहार: ईरान ने क्षेत्रीय देशों बहरीन और कुवैत में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों, एयरबेस और रडार स्थापित परिसरों को अपने हमलों का निशाना बनाया।

     

  • मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल: इन ठिकानों पर कई मिसाइलें और ड्रोन दागे गए, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह हाई अलर्ट पर आ गई है। बहरीन और कुवैत की सुरक्षा एजेंसियों ने कई हमलों को हवा में ही विफल करने का दावा किया है, लेकिन इस संघर्ष के फैलने से खाड़ी देशों की चिंताएं बहुत अधिक बढ़ गई हैं।

4. वैश्विक शांति और ऊर्जा बाजार पर मंडराया बड़ा संकट

अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी इस सीधी जंग का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ने लगा है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खाड़ी क्षेत्र में लगातार हो रहे बम धमाकों और मिसाइल हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अपनी गतिविधियों को सीमित कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष इसी तरह जारी रहा, तो कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है और वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं, हालांकि जमीन पर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

 

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