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अभिजीत दीपके ने किया साफ: CJP को नहीं बनाएंगे राजनीतिक पार्टी, देश में प्रेशर ग्रुप की तरह काम करेगा संगठन


महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया है कि उनका संगठन फिलहाल कोई राजनीतिक पार्टी नहीं बनेगा। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि इस समय भारत को किसी नई राजनीतिक पार्टी के बजाय एक मजबूत प्रेशर ग्रुप और बड़े जन आंदोलन की जरूरत है, और CJP इसी भूमिका में देशहित के लिए काम करेगी।

अभिजीत दीपके ने अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर वे अपने संगठन को राजनीतिक पार्टी का रूप दे देते, तो उनका आंदोलन कभी इतना सफल नहीं होता। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन की सफलता का मुख्य कारण यह रहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने वाली नीतियों और व्यवस्थाओं के खिलाफ अलग-अलग विचारधाराओं और राजनीतिक दलों के लोग एक साथ आए।

CJP की दो दिवसीय बैठक: भविष्य की रणनीति और देश के मुद्दों पर चर्चा

छत्रपति संभाजीनगर में CJP की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक की शुरुआत हो रही है। इस बैठक से पहले पत्रकारों को जानकारी देते हुए अभिजीत दीपके ने बताया कि दो दिनों तक चलने वाले इस मंथन में कई अहम विषयों पर बातचीत की जाएगी:

  • जंतर-मंतर आंदोलन का मूल्यांकन: हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बड़े प्रदर्शनों और आंदोलनों की समीक्षा की जाएगी।

  • देशभर में संगठन का विस्तार: CJP को देश के कोने-कोने तक पहुँचाने और युवाओं को जोड़ने की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।

  • राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों पर मंथन: बेरोजगारी, देश की आर्थिक स्थिति, E20 पेट्रोल के प्रभाव, शिक्षा व्यवस्था, मीडिया की भूमिका और न्यायपालिका की मौजूदा स्थिति जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा होगी।

प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग

बैठक के दौरान CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने छात्र प्रदर्शनकारियों के अधिकार और उनकी सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि हालिया आंदोलनों के दौरान पुलिस द्वारा छात्रों पर दर्ज किए गए मुकदमों (FIR) को वापस लेने के लिए सरकार के साथ बातचीत की प्रक्रिया जारी है।

इसके साथ ही, संगठन उन प्रदर्शनकारियों को कानूनी और चिकित्सीय सहायता भी प्रदान कर रहा है जो आंदोलनों के दौरान घायल हुए थे। सौरव दास ने यह भी जानकारी दी कि प्रसिद्ध समाज सेवी और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक संगठन के मार्गदर्शक (मेंटर) बने रहेंगे और CJP समय-समय पर विभिन्न मुद्दों पर उनसे सलाह लेती रहेगी।

नीट-यूजी पेपर लीक आंदोलन से मिली थी CJP को पहचान

अभिजीत दीपके 6 जून को अमेरिका से भारत लौटे थे। भारत आते ही उन्होंने नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुए पेपर लीक के खिलाफ एक बड़े विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की। इस आंदोलन ने देखते ही देखते पूरे देश के युवाओं और छात्रों को अपनी ओर आकर्षित किया।

देशभर से युवा और छात्र दिल्ली पहुँचे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की माँग करने लगे। इस दौरान छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जोरदार माँग की।

युवाओं और 'जेन-जी' (Gen-Z) पीढ़ी से मिले ज़बरदस्त समर्थन के कारण यह आंदोलन बहुत चर्चा में रहा। लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के दबाव के कारण पिछले हफ्ते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

हालाँकि, जैसे-जैसे यह आंदोलन देश के अलग-अलग शहरों में फैला, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बिहार जैसे राज्यों में प्रदर्शन उग्र और हिंसक हो गए। इसके बाद पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कई छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कर लिए थे, जिन्हें अब वापस कराने का प्रयास किया जा रहा है।

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