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अंगदान महाअभियान में भीलवाड़ा ने रचा स्वर्णिम इतिहास: महज एक महीने में 24 हजार से अधिक नागरिकों ने ली शपथ, आज जयपुर में मिलेगा राज्यस्तरीय सर्वोच्च सम्मान


राजस्थान का वस्त्रनगरी के नाम से प्रसिद्ध भीलवाड़ा जिला अब केवल उद्योगों के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार और मानव सेवा के क्षेत्र में भी पूरे देश के लिए एक नई मिसाल बनकर उभरा है। अंगदान यानी ऑर्गन डोनेशन जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और जीवनरक्षक महाअभियान में भीलवाड़ा ने पूरे भारत और प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है।

जिले के नागरिकों की जागरूकता, प्रशासनिक दूरदर्शिता और स्वास्थ्य विभाग के निष्ठावान प्रयासों के कारण केवल 30 दिनों के भीतर 24 हजार से अधिक लोगों ने मरणोपरांत अपने अंगों का दान करने की आधिकारिक शपथ ली है। इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व उपलब्धि के उपलक्ष्य में आज राजधानी जयपुर में आयोजित होने वाले एक भव्य राज्यस्तरीय समारोह में भीलवाड़ा जिले के प्रशासनिक नेतृत्व और पूरी टीम को सम्मानित किया जाएगा।

1. एक महीने का विशेष अभियान और 24 हजार संकल्प पत्रों का रिकॉर्ड

अंगदान अभियान के तहत भीलवाड़ा जिले में चलाए गए जागरूकता कार्यक्रम का असर जमीनी स्तर पर बेहद व्यापक देखने को मिला। जिले के युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों ने पूरी आत्मीयता के साथ इस पुनीत कार्य में हिस्सा लिया।

  • पंजीकरण का नया कीर्तिमान: मात्र एक महीने की अवधि में 24,000 से अधिक नागरिकों ने केंद्र व राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल और फिजिकल फॉर्म्स के माध्यम से अंगदान का संकल्प पत्र भरा।

  • भ्रांतियों का हुआ अंत: ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर लोगों को समझाया कि मृत्यु के पश्चात मानव शरीर के अंग किसी अन्य तड़पते हुए मरीज के लिए नया जीवन बन सकते हैं। इस संदेश ने लोगों के मन से पुरानी भ्रांतियों और अंधविश्वास को पूरी तरह समाप्त कर दिया।

2. जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संस्थाओं का त्रिस्तरीय मॉडल

भीलवाड़ा जिले को पूरे देश में पहला स्थान दिलाने के पीछे एक सोची-समझी और सुनियोजित कार्ययोजना थी। जिला कलेक्टर के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं ने मिलकर एक त्रिस्तरीय मॉडल पर काम किया।

  1. गांव-गांव में विशेष शिविरों का आयोजन: जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत, उपखंड मुख्यालय, सरकारी व निजी महाविद्यालयों और जिला अस्पतालों में विशेष पंजीकरण काउंटर और शिविर लगाए गए।

  2. आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का योगदान: जमीनी स्तर पर आशा सहयोगिनियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने महिलाओं और परिवार के मुखियाओं को अंगदान के वैज्ञानिक व मानवीय महत्व के बारे में जागरूक किया।

  3. डिजिटल और सांस्कृतिक प्रचार: सोशल मीडिया अभियानों, नुक्कड़ नाटकों, प्रभात फेरियों और पोस्टर प्रदर्शनियों के माध्यम से पूरे जिले में एक सकारात्मक माहौल तैयार किया गया।

3. आज जयपुर में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में होगा भव्य नागरिक सम्मान

अंगदान के इस महाअभियान में राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश में शीर्ष स्थान प्राप्त करने की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर आज जयपुर के बिडला ऑडिटोरियम में एक विशेष राज्यस्तरीय सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है।

  • वरिष्ठ मंत्रियों के हाथों मिलेगा सम्मान: इस समारोह में राज्य के मुख्य अतिथि, स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भीलवाड़ा के जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और उनकी पूरी टीम को विशेष प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया जाएगा।

  • राज्य के लिए रोल मॉडल बना भीलवाड़ा: प्रदेश सरकार का मानना है कि भीलवाड़ा का यह 'अंगदान मॉडल' राज्य के अन्य सभी जिलों के लिए एक प्रेरणास्रोत का काम करेगा, ताकि पूरे राजस्थान में अंगदान को लेकर एक जनक्रांति लाई जा सके।

4. चिकित्सा जगत की दृष्टि से क्यों संजीवनी है यह संकल्प?

भारत में हर साल लाखों लोग अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) की प्रतीक्षा सूची में रहते हुए समय पर अंग न मिलने के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। देश में विशेष रूप से किडनी, लिवर, हार्ट (हृदय), कॉर्निया (आंखें) और फेफड़ों की भारी कमी बनी रहती है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति मरणोपरांत या 'ब्रेन डेड' की स्थिति में अपने अंगों का दान करता है, तो उसके द्वारा दिए गए अंगों से कम से कम 8 गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। इसके अलावा, उसकी आंखों और अन्य टिश्यूज से कई अन्य लोगों के जीवन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आ सकता है। भीलवाड़ा के 24 हजार से अधिक नागरिकों द्वारा लिया गया यह सामूहिक संकल्प भविष्य में अनगिनत परिवारों के लिए जीवनदायिनी संजीवनी साबित होने वाला है।

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