जल जीवन मिशन के तहत बाणसागर बांध से गांवों तक पेयजल पहुंचाने की योजना में कथित अनियमितताओं के आरोप, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने शुरू की पड़ताल
सतना जिले में जल जीवन मिशन के तहत संचालित 1872 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी पेयजल परियोजना अब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की जांच के दायरे में आ गई है। बाणसागर बांध से जिले के 785 गांवों तक पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं।
परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। इसके लिए पाइपलाइन बिछाने, जल संरचनाओं के निर्माण और अन्य आवश्यक कार्यों की योजना बनाई गई थी। हालांकि अब परियोजना की प्रगति और कार्यों के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
82 प्रतिशत काम कागजों में पूरा होने का आरोप
परियोजना को लेकर आरोप है कि करीब 82 प्रतिशत कार्य केवल अभिलेखों में पूरा दर्शाया गया, जबकि मौके पर वास्तविक स्थिति इससे अलग है। शिकायतों में यह भी सवाल उठाया गया है कि जिन गांवों को योजना से लाभान्वित किए जाने का दावा किया गया, वहां वास्तव में पेयजल आपूर्ति किस स्थिति में है।
जांच का प्रमुख बिंदु यही है कि परियोजना में दर्ज प्रगति और धरातल पर हुए काम के बीच कितना अंतर है। यदि अभिलेखों में दर्शाए गए कार्य और वास्तविक निर्माण में अंतर पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है।
बाणसागर से 785 गांवों तक पहुंचना है पानी
इस परियोजना के माध्यम से बाणसागर बांध से पानी लेकर सतना जिले के 785 गांवों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट को दूर करने के उद्देश्य से इसे महत्वपूर्ण परियोजना माना गया है।
योजना के तहत गांवों में जलापूर्ति के लिए पाइपलाइन, जल संग्रहण और वितरण से जुड़ी व्यवस्थाएं विकसित की जानी हैं। परियोजना पूरी होने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को नियमित पेयजल सुविधा मिलने की उम्मीद है।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ कर रहा जांच
परियोजना में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतों के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने मामले की पड़ताल शुरू की है। जांच के दौरान परियोजना से जुड़े दस्तावेज, भुगतान विवरण, कार्य की प्रगति और निर्माण स्थलों की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया जा सकता है।
अधिकारियों की जांच में यह भी देखा जाएगा कि परियोजना के लिए स्वीकृत राशि का उपयोग निर्धारित कार्यों में हुआ या नहीं। साथ ही जिन कार्यों को पूर्ण बताया गया है, उनकी मौके पर स्थिति का सत्यापन भी महत्वपूर्ण होगा।
गांवों में पानी पहुंचने का इंतजार
पेयजल परियोजना पर लगे आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल उन ग्रामीणों से जुड़ा है, जिन्हें इस योजना के माध्यम से घर तक पानी मिलने की उम्मीद है। यदि परियोजना में काम की गति और गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सही पाई जाती हैं तो इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था पर पड़ सकता है।
फिलहाल जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परियोजना में वास्तव में कितनी अनियमितताएं हुई हैं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी

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