उज्जैन। देवास के जंगल में वन संपदा की रक्षा करते हुए जान गंवाने वाले उज्जैन निवासी वन रक्षक मदनलाल वर्मा के परिवार को शहीद का दर्जा मिलने में पांच साल लग गए। 14 अगस्त को भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में उनकी पत्नी कृष्णा वर्मा को शॉल, श्रीफल और सम्मान प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। परिवार को उम्मीद थी कि शहादत के वर्षों बाद अब सरकार की ओर से किए गए अन्य वादे भी पूरे होंगे, लेकिन इसी बीच उन्हें अपने मकान को लेकर नोटिस मिलने से परेशानी बढ़ गई है।
मदनलाल वर्मा ने जंगल और वन संपदा की सुरक्षा के दौरान अपनी जान गंवाई थी। उनके परिवार का कहना है कि घटना के बाद उन्हें आश्वासन दिया गया था कि सरकार की ओर से शहीद परिवार को आर्थिक सहायता के साथ आवास सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके बावजूद इन घोषणाओं को पूरा होने में लंबा समय लग गया।
पांच साल बाद मिला शहीद का दर्जा
मदनलाल वर्मा की मृत्यु के बाद परिवार लगातार उन्हें शहीद का दर्जा देने की मांग करता रहा। करीब पांच वर्ष बाद सरकार ने उन्हें शहीद का दर्जा दिया।
14 अगस्त को भोपाल में उनकी पत्नी कृष्णा वर्मा को सम्मानित किया गया। उन्हें शॉल, श्रीफल और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। परिवार के लिए यह सम्मान महत्वपूर्ण था, लेकिन इसके साथ ही वर्षों से लंबित आर्थिक और अन्य सहायता की उम्मीदें भी जुड़ी हुई हैं।
एक करोड़ रुपए और आवास का इंतजार
परिवार के मुताबिक, मदनलाल वर्मा को शहीद का दर्जा दिए जाने के साथ एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता और आवास उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया था। परिवार का कहना है कि इन घोषणाओं पर अब तक पूरी तरह अमल नहीं हुआ है।
परिजनों का कहना है कि शहादत के बाद पांच साल तक उन्हें सरकारी प्रक्रिया और आश्वासनों के बीच इंतजार करना पड़ा। अब जब सम्मान मिला है, तो उन्हें उम्मीद है कि लंबित सहायता भी जल्द उपलब्ध कराई जाएगी।
जिस घर में रह रहे, उसी को लेकर नोटिस
परिवार की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। जिस मकान में परिवार रह रहा है, उसे लेकर भी तोड़ने का नोटिस दिया गया है। इससे परिवार के सामने आवास की समस्या खड़ी हो गई है।
परिजनों का कहना है कि एक तरफ सरकार शहीद परिवार के रूप में सम्मान दे रही है, वहीं दूसरी ओर उनके मौजूदा घर को लेकर कार्रवाई की स्थिति बन रही है। परिवार चाहता है कि पहले उसके आवास की व्यवस्था की जाए और उसके बाद ही किसी तरह की कार्रवाई की जाए।
सम्मान के साथ सुविधाएं मिलने की उम्मीद
कृष्णा वर्मा और परिवार के अन्य सदस्यों का कहना है कि सम्मान मिलना उनके लिए गर्व की बात है, लेकिन शहीद परिवार को मिलने वाली घोषणाओं और सुविधाओं का लाभ भी समय पर मिलना चाहिए।
परिवार अब सरकार से एक करोड़ रुपए की सहायता, आवास और अन्य लंबित वादों को पूरा करने की मांग कर रहा है। साथ ही घर तोड़ने के नोटिस पर भी पुनर्विचार की अपेक्षा जताई है।
पांच साल बाद भी सवाल बरकरार
मदनलाल वर्मा के परिवार के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि शहीद का दर्जा मिलने के बाद बाकी घोषणाएं कब पूरी होंगी। पांच वर्ष तक सम्मान की प्रतीक्षा करने के बाद परिवार को अब आर्थिक सहायता और सुरक्षित आवास के लिए फिर से सरकारी प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है।
परिवार का कहना है कि वन संपदा की सुरक्षा करते हुए जान गंवाने वाले कर्मचारी के परिवार को केवल सम्मान तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि सरकार द्वारा किए गए सभी वादों को भी समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।

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