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भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ी, 8 नेताओं को मिली जिम्मेदारी


भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा की। नई टीम में मध्यप्रदेश से 8 नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी दी गई है। पिछली राष्ट्रीय टीम में प्रदेश के 3 नेताओं को स्थान मिला था। इस बार संख्या बढ़ने से मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व पहले की तुलना में काफी मजबूत हुआ है।

नई टीम में वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों से जुड़े चेहरों को भी जगह दी गई है। वहीं पार्टी के कुछ पुराने और चर्चित नेताओं को इस बार राष्ट्रीय संगठन में स्थान नहीं मिला।

कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल को जगह नहीं

नई राष्ट्रीय टीम में मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल को शामिल नहीं किया गया है। दोनों नेता केंद्र और प्रदेश संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

कैलाश विजयवर्गीय फिलहाल मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री हैं, जबकि प्रह्लाद पटेल भी प्रदेश सरकार में महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में दोनों को राष्ट्रीय टीम से बाहर रखने को पार्टी की मौजूदा रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

पिछली बार तीन नेता, अब आठ चेहरे

2023 में घोषित राष्ट्रीय टीम में मध्यप्रदेश से तीन नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिली थी। नई टीम में यह संख्या बढ़कर आठ हो गई है।

इस विस्तार को प्रदेश संगठन के बढ़ते महत्व के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने राष्ट्रीय संगठन में मध्यप्रदेश के नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारी देकर प्रदेश की भागीदारी बढ़ाई है।

वीडी शर्मा की जिम्मेदारी बढ़ी या नई भूमिका?

खजुराहो सांसद और मध्यप्रदेश भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी मिली है। उन्हें पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है।

इस नई व्यवस्था के जरिए पार्टी अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों और पेशेवर लोगों को संगठन से जोड़ने पर जोर दे रही है। हालांकि राजनीतिक तौर पर यह भी चर्चा है कि यह जिम्मेदारी वीडी शर्मा के प्रभाव को बढ़ाने का संकेत है या राष्ट्रीय संगठन में उन्हें नई भूमिका देने का प्रयास।

सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर जोर

नई टीम में मध्यप्रदेश से शामिल नेताओं में अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व दिखाई देता है। आदिवासी, ओबीसी, अनुसूचित जाति और अन्य वर्गों से जुड़े चेहरों को संगठन में जिम्मेदारी दी गई है।

पार्टी की कोशिश राष्ट्रीय संगठन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की दिखाई दे रही है। इसके साथ ही युवा चेहरों को भी आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है।

मध्यप्रदेश के लिए क्यों अहम है यह बदलाव

राष्ट्रीय टीम में मध्यप्रदेश से आठ नेताओं को जगह मिलने से प्रदेश भाजपा का राष्ट्रीय संगठन में प्रभाव बढ़ा है। अब इन नेताओं को संगठन विस्तार, मोर्चों, प्रकोष्ठों और अन्य राष्ट्रीय गतिविधियों में काम करना होगा।

हालांकि वरिष्ठ नेताओं को जगह नहीं मिलने से राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हैं। खासतौर पर कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल को राष्ट्रीय टीम से बाहर रखने के कारणों को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं।

नई टीम के गठन के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मध्यप्रदेश से चुने गए आठ नेता राष्ट्रीय संगठन में किस तरह की भूमिका निभाते हैं और उनकी जिम्मेदारियों का प्रदेश की राजनीति पर कितना असर पड़ता है।

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