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बालाघाट के आदिवासी इलाकों में दो महीने में 19 बच्चों की मौत, इलाज तक पहुंच बनी चुनौती


बालाघाट जिले के बैगा और गोंड बहुल गांवों में पिछले दो महीनों के दौरान 19 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। इनमें कोरका, मातला, मछुरदा और कोंडेकसा जैसे गांव शामिल हैं। ये इलाके पहले से नक्सल प्रभावित रहे हैं।

बच्चों की मौत के बीच सबसे बड़ी चुनौती उन्हें समय पर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने की सामने आ रही है। दुर्गम इलाकों और सीमित परिवहन सुविधाओं के कारण बीमार बच्चों को स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाना परिवारों के लिए मुश्किल बना हुआ है।

बीमारी के बीच अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती

इन गांवों में जब बच्चों की तबीयत बिगड़ती है तो उन्हें अस्पताल ले जाने में काफी परेशानी होती है। कई स्थानों पर परिवहन की सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गंभीर हालत वाले बच्चों को समय पर उपचार मिलना चुनौती बन जाता है।

स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच कमजोर होने का असर बच्चों के इलाज पर भी पड़ रहा है।

युवाओं ने संभाली मदद की जिम्मेदारी

इलाके के युवाओं ने बीमार बच्चों को अस्पताल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब तक स्थानीय युवाओं की मदद से 100 से अधिक बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया जा चुका है।

ग्रामीण युवाओं की यह पहल उन परिवारों के लिए सहारा बनी है, जिन्हें अचानक बच्चों को अस्पताल ले जाने के लिए साधन नहीं मिल पाता।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच की समस्या

कोरका, मातला, मछुरदा और कोंडेकसा जैसे गांव लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे हैं। इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य और परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच आसान नहीं रही है।

ग्रामीणों के सामने बीमारी के साथ-साथ अस्पताल तक पहुंचने की समस्या भी बनी हुई है। ऐसे में स्थानीय युवाओं की सक्रियता से कई बच्चों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल पाई।

19 बच्चों की मौत ने बढ़ाई चिंता

दो महीने में 19 बच्चों की मौत सामने आने के बाद इलाके में चिंता बढ़ गई है। इन मौतों के कारणों की स्पष्ट जानकारी के लिए स्वास्थ्य विभाग की जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

ग्रामीणों की मांग है कि दूरदराज के गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए, नियमित स्वास्थ्य जांच हो और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए बेहतर परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

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