इंदौर। साध्वी हर्षा रिछारिया एक बार फिर कांवड़ यात्रा को लेकर दिए गए बयान के कारण चर्चा में हैं। इंदौर विधायक गोलू शुक्ला की बाणेश्वरी कांवड़ यात्रा में शामिल होने के कुछ दिन बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कांवड़ यात्राओं में बढ़ती कुछ गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक यात्रा का उद्देश्य श्रद्धा और भक्ति होना चाहिए, न कि ऐसी गतिविधियां जिनसे धर्म की छवि प्रभावित हो।
साध्वी हर्षा ने अपने वीडियो में कांवड़ यात्राओं के दौरान नशे, शराब, गांजा, तेज आवाज वाले डीजे और आपत्तिजनक नृत्य जैसी गतिविधियों पर नाराजगी जताई। उन्होंने सरकार से ऐसी गतिविधियों पर सख्ती करने की मांग की है।
चार दिन पहले यात्रा की तारीफ की थी
साध्वी हर्षा कुछ दिन पहले बाणेश्वरी कांवड़ यात्रा में शामिल हुई थीं। उस दौरान उन्होंने युवाओं की श्रद्धा और एक-दूसरे के सहयोग की भावना की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि यात्रा में धार्मिक आस्था और संस्कृति से जुड़ाव दिखाई दे रहा है।
अब सोशल मीडिया पर जारी नए वीडियो में उन्होंने कांवड़ यात्रा के दौरान दिखाई देने वाली कुछ गतिविधियों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा से जुड़ी यात्रा में मर्यादा और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।
नशे को लेकर जताई नाराजगी
साध्वी हर्षा ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ स्थानों पर शराब और गांजे के इस्तेमाल की बातें सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि नशे की हालत में धार्मिक यात्रा में शामिल होना उचित नहीं है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि यात्रा के दौरान नशे का सेवन करने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि कांवड़ यात्रा श्रद्धा और समर्पण के साथ निकाली जानी चाहिए।
डीजे और झांकियों को लेकर भी सवाल
उन्होंने कांवड़ यात्राओं में तेज आवाज वाले डीजे और बड़ी झांकियों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि धार्मिक यात्रा का स्वरूप ऐसा होना चाहिए, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था और वातावरण की मर्यादा बनी रहे।
उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती के रूप में प्रस्तुतियां देने के दौरान आपत्तिजनक नृत्य किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि धार्मिक पात्रों का रूप धारण करके अशोभनीय प्रदर्शन करने से धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग
साध्वी हर्षा ने कहा कि कांवड़ यात्रा में अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रशासन को स्पष्ट नियमों का पालन कराना चाहिए। नशे, अश्लील प्रस्तुतियों और अत्यधिक तेज आवाज वाले कार्यक्रमों पर रोक लगाने की जरूरत है।
उन्होंने संत समाज और धार्मिक संगठनों से भी इस विषय पर अपनी बात रखने की अपील की। उनका कहना है कि समय रहते ऐसी गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले वर्षों में इनका चलन और बढ़ सकता है।
श्रद्धा के साथ यात्रा निकालने की अपील
साध्वी हर्षा ने कहा कि कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ शामिल होते हैं। ऐसे श्रद्धालुओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से यात्रा करने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धार्मिक यात्राओं की पहचान भक्ति, अनुशासन और समर्पण से होनी चाहिए। उनका उद्देश्य कांवड़ यात्रा पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि यात्रा के दौरान होने वाली उन गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग करना है, जो धार्मिक भावनाओं और यात्रा की गरिमा को प्रभावित कर सकती हैं।

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