किसान सम्मान निधि की राशि दिलाने का झांसा देकर दस्तावेजों पर करवाए हस्ताक्षर, बैंक दलाल से मिलीभगत का आरोप
गुना जिले की चांचौड़ा तहसील के ग्राम तेलीगांव में जालसाजी और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि गांव के ही एक युवक ने बैंक से जुड़े एक बिचौलिए के साथ मिलकर भाई-बहन को किसान सम्मान निधि की राशि दिलाने का झांसा दिया। दोनों को योजना के तहत दो-दो हजार रुपये मिलने की बात कहकर उनके जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। बाद में उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल उनके नाम पर करीब 4.85 लाख रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड ऋण स्वीकृत कराने में किए जाने का आरोप है।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद पीड़ित भाई-बहन को अपने नाम पर लिए गए ऋण का पता चला। इसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई और पूरे प्रकरण की जांच की मांग की।
सम्मान निधि का लाभ दिलाने के नाम पर लिए दस्तावेज
पीड़ितों के मुताबिक, गांव के युवक ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि किसान सम्मान निधि की राशि उनके खातों में नियमित रूप से आएगी। इसी प्रक्रिया के लिए आधार कार्ड, बैंक संबंधी कागजात और अन्य दस्तावेजों की जरूरत बताई गई।
आरोप है कि इसी बहाने दोनों से विभिन्न कागजातों पर हस्ताक्षर कराए गए। पीड़ितों को यह जानकारी नहीं थी कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंक से ऋण लेने के लिए किया जा रहा है।
नाम पर लाखों रुपये का ऋण होने की जानकारी मिली
बाद में जब भाई-बहन को अपने नाम पर किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए ऋण स्वीकृत होने की जानकारी मिली तो वे हैरान रह गए। बताया गया कि दोनों के नाम पर कुल करीब 4.85 लाख रुपये का ऋण दर्ज है।
पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने किसी प्रकार का ऋण लेने के लिए आवेदन नहीं किया था और न ही उन्हें बैंक से इतनी बड़ी राशि मिलने की जानकारी थी। इसके बाद उन्होंने मामले की पड़ताल शुरू की और संबंधित बैंक तथा अधिकारियों से जानकारी जुटाई।
बैंक से जुड़े बिचौलिए की भूमिका की भी जांच
मामले में गांव के युवक के साथ बैंक से जुड़े बिचौलिए की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि दोनों की मिलीभगत से पीड़ितों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ऋण संबंधी प्रक्रिया पूरी की गई।
अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ऋण के लिए आवेदन किसने तैयार किया, दस्तावेज बैंक तक किस माध्यम से पहुंचे और खाते में स्वीकृत राशि का उपयोग किसने किया।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
मामले में पीड़ित पक्ष ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि किसान सम्मान निधि जैसी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर उनके साथ विश्वासघात किया गया और उनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया गया।
पुलिस और संबंधित विभाग की जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जालसाजी, धोखाधड़ी और दस्तावेजों के दुरुपयोग से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल मामले में ऋण से जुड़े दस्तावेजों और बैंक अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी किसान क्रेडिट कार्ड की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी और ऋण की राशि का इस्तेमाल किसने किया।

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