भोपाल। मध्य प्रदेश में खनन क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था और राजस्व के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन खदानों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। संसद में खान मंत्रालय की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2023 से 2025 के बीच प्रदेश की कोयला और अन्य खदानों में 26 जानलेवा हादसे हुए। इन घटनाओं में 31 श्रमिकों की मौत हुई, जबकि 50 श्रमिक घायल हुए।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार चुनौती बनी हुई है। खासकर कोयला और पत्थर-खनिज से जुड़ी खदानों में काम करने वाले श्रमिकों को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है। खनन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी चूक, सुरक्षा नियमों का पालन नहीं होना और भारी मशीनों के संचालन में लापरवाही हादसों की प्रमुख वजहों में शामिल रही है।
तीन साल में 26 जानलेवा हादसे
खान मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में 2023 से 2025 के बीच कुल 26 घातक खदान हादसे दर्ज किए गए। इन दुर्घटनाओं में 31 श्रमिकों की जान चली गई। इसके अलावा 50 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हुए।
खनन कार्य की प्रकृति को देखते हुए यहां छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। खदानों में काम करने वाले कर्मचारियों को जमीन के भीतर और खुले खनन क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के खतरे झेलने पड़ते हैं।
कोयला और पत्थर खदानों में ज्यादा जोखिम
मध्य प्रदेश में कोयला खनन के साथ-साथ पत्थर और अन्य खनिजों का भी बड़े स्तर पर उत्खनन होता है। इन क्षेत्रों में मशीनों, ड्रिलिंग उपकरणों, विस्फोटक सामग्री और भारी वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है।
सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होने पर इन गतिविधियों के दौरान गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में सामने आए हादसों में भी इसी तरह के कई कारण सामने आए हैं।
देश के अधिक हादसे वाले राज्यों में एमपी
खनन हादसों के राष्ट्रीय आंकड़ों में मध्य प्रदेश भी उन राज्यों में शामिल है, जहां कोयला और गैर-कोयला खदानों में दुर्घटनाओं की संख्या उल्लेखनीय रही है। झारखंड, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के साथ मध्य प्रदेश में भी खनन क्षेत्र में होने वाले हादसों को लेकर चिंता बनी हुई है।
कोयला और अन्य खदानों के आंकड़ों को मिलाकर देखा जाए तो गंभीर रूप से घायल श्रमिकों और घातक दुर्घटनाओं के मामले में प्रदेश की स्थिति सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत की ओर संकेत करती है।
छत गिरना हादसों की बड़ी वजह
खान मंत्रालय की जांच में खदानों में होने वाले हादसों के पीछे कई तकनीकी और प्रबंधन संबंधी कमियां सामने आई हैं। खदानों में अचानक छत गिरना भी गंभीर दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण रहा है।
भूमिगत खनन में यदि छत को मजबूत रखने के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय नहीं किए जाएं तो अचानक मलबा गिरने से श्रमिक उसकी चपेट में आ सकते हैं। ऐसे हादसों में बचाव का समय भी बेहद कम होता है।
ऊंचाई से गिरने और मलबे का खतरा
खदानों में ऊंचाई वाले स्थानों पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए भी जोखिम बना रहता है। ऊंचाई से श्रमिक के गिरने या ऊपर से मलबा नीचे आने की स्थिति में गंभीर चोट लग सकती है।
सुरक्षा उपकरणों का सही इस्तेमाल नहीं होना और कार्यस्थल पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था न होना ऐसे हादसों की आशंका बढ़ा सकता है। जांच में इस तरह की घटनाओं को भी हादसों के कारणों में शामिल किया गया है।
ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग के दौरान भी खतरा
खनन प्रक्रिया में ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग महत्वपूर्ण चरण हैं। इन कार्यों के दौरान सुरक्षा प्रक्रिया में थोड़ी भी चूक होने पर पत्थरों के टुकड़े तेज गति से आसपास फैल सकते हैं।
ऐसी घटनाओं में मौके पर मौजूद श्रमिकों के घायल होने या जान जाने का खतरा रहता है। इसलिए ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग के दौरान निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का पालन करना बेहद जरूरी है।
रस्सी और जंजीर टूटने से भी दुर्घटनाएं
खनन क्षेत्र में भारी सामान और उपकरणों को उठाने तथा स्थानांतरित करने के लिए रस्सियों, जंजीरों और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। इनके टूटने से भी गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
यदि उपकरणों की नियमित जांच नहीं की जाए या उनकी क्षमता से अधिक भार उठाया जाए तो अचानक टूटने की स्थिति में श्रमिक इसकी चपेट में आ सकते हैं। जांच रिपोर्ट में इस तरह की तकनीकी खामियों को भी हादसों से जोड़ा गया है।
भारी मशीनों के संचालन में लापरवाही
खदानों में डंपर, ट्रक और अन्य भारी मशीनों का लगातार इस्तेमाल होता है। इन वाहनों के संचालन में लापरवाही भी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
मशीनों के आसपास काम करने वाले श्रमिकों और वाहन चालकों के बीच समन्वय की कमी, निर्धारित गति का पालन नहीं करना या सुरक्षा दूरी बनाए नहीं रखना दुर्घटना का कारण बन सकता है।
सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई
सरकार के अनुसार खदानों में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियां संहिता, 2020 के तहत दंडात्मक प्रावधान लागू किए जा रहे हैं।
सरकार का कहना है कि खनन क्षेत्र में श्रमिकों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। जांच के दौरान यदि किसी खदान में निर्धारित सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
श्रमिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
खनन क्षेत्र में उत्पादन और राजस्व के साथ श्रमिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। तीन साल में 31 श्रमिकों की मौत और 50 के घायल होने के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की जरूरत है।
खदानों में नियमित निरीक्षण, उपकरणों की जांच, सुरक्षा प्रशिक्षण और नियमों के पालन की निगरानी को प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है। इससे हादसों की संभावना कम की जा सकती है और खनन क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है।

✍️ प्रतिक्रिया दें (Leave a Comment)