सीहोर में अवैध उत्खनन पर 2.43 करोड़ रुपये का जुर्माना, पोकलेन मशीनों और नावों से रेत निकालने के आरोप
सीहोर जिले में नर्मदा नदी से अवैध रेत उत्खनन का सिलसिला पूरी तरह थमता नजर नहीं आ रहा है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के प्रतिबंध के बावजूद नदी के अलग-अलग हिस्सों में रेत निकालने की गतिविधियां जारी रहने के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर मशीनों और नावों की मदद से नदी की तलहटी से रेत निकाली जा रही है और बड़े वाहनों के जरिए इसे दूसरे स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
अवैध खनन पर प्रशासन और खनिज विभाग की ओर से लगातार कार्रवाई किए जाने के बावजूद गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में अब तक अवैध खनन और परिवहन से जुड़े मामलों में 389 कार्रवाई की जा चुकी हैं। इन प्रकरणों में करीब 2.43 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
पोकलेन और नावों से निकाली जा रही रेत
नर्मदा नदी के कुछ हिस्सों में रेत निकालने के लिए पोकलेन जैसी भारी मशीनों के इस्तेमाल के आरोप सामने आए हैं। वहीं, नदी के गहरे हिस्सों से रेत निकालने के लिए नावों का सहारा लिए जाने की बात भी कही जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रात के समय गतिविधियां बढ़ जाती हैं। नदी से निकाली गई रेत को वाहनों में भरकर नदी क्षेत्र से बाहर ले जाने का काम किया जाता है। इससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप के साथ आसपास के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
389 मामलों में कार्रवाई, फिर भी नहीं लगा अंकुश
प्रशासन की ओर से अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ कार्रवाई की गई है। 389 मामलों में कार्रवाई करते हुए करीब 2.43 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद नदी से रेत उत्खनन की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
कार्रवाई के बाद भी यदि वही गतिविधियां दोबारा शुरू हो जाती हैं तो निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल जुर्माना लगाने के बजाय अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और वाहनों पर भी प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए।
पर्यावरण को नुकसान की आशंका
नर्मदा नदी से लगातार बड़े पैमाने पर रेत निकाले जाने से नदी के जल प्रवाह, तटों और जलीय पारिस्थितिकी पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। नदी की तलहटी में मशीनों के इस्तेमाल से प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो सकती है।
पर्यावरण से जुड़े लोगों का कहना है कि नदी क्षेत्र में खनन संबंधी प्रतिबंधों का सख्ती से पालन होना चाहिए। यदि अवैध उत्खनन पर समय रहते प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो इसका असर नदी और आसपास के पर्यावरण पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।
निगरानी और कार्रवाई बढ़ाने की जरूरत
नर्मदा क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन रोकना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है। स्थानीय लोगों की मांग है कि नदी के संवेदनशील हिस्सों में नियमित निगरानी की जाए और रात के समय भी गश्त बढ़ाई जाए।
साथ ही पोकलेन, नाव और रेत परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। अब देखना होगा कि लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच प्रशासन अवैध रेत उत्खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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