भोपाल। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान के मामले में जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह को लेकर मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। मंगलवार को हुई बैठक में एसआईटी की रिपोर्ट और मामले के कानूनी पहलुओं पर चर्चा के बाद शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
मामले में 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। इससे पहले राज्य सरकार को अदालत को यह बताना है कि एसआईटी की ओर से अभियोजन की अनुमति मांगे जाने के बाद सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।
अधिकारियों को बाहर भेजने के बाद हुई चर्चा
रूटीन कैबिनेट बैठक के तुरंत बाद पांच वरिष्ठ अधिकारियों को छोड़कर अन्य अधिकारियों को बैठक कक्ष से बाहर जाने के लिए कहा गया। इसके बाद विजय शाह ने मंत्रियों के सामने एसआईटी की रिपोर्ट के संबंध में अपना पक्ष रखा और अपनी सफाई पेश की।
शाह की बात सुनने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें बैठक कक्ष से बाहर भेज दिया। इसके बाद मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच मामले के कानूनी पहलुओं तथा अभियोजन की अनुमति नहीं देने से जुड़े तर्कों पर चर्चा हुई।
करीब 45 मिनट तक चली चर्चा के बाद शाह के खिलाफ केस चलाने की अनुमति नहीं देने पर सहमति बनने की जानकारी सामने आई। इस दौरान विजय शाह कैबिनेट कक्ष के बाहर मौजूद रहे।
सरकार ने अटॉर्नी जनरल की राय भी ली
एसआईटी की रिपोर्ट कैबिनेट के सामने रखने से पहले राज्य सरकार ने अटॉर्नी जनरल की राय भी ली थी। अब कैबिनेट के फैसले के बाद पूरी प्रक्रिया राज्यपाल के स्तर तक जाएगी।
मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 31 अगस्त को है। अदालत में राज्य सरकार को हलफनामा देकर अपनी कार्रवाई की जानकारी देनी है।
मंत्रियों ने माफी का तर्क दिया
कैबिनेट में हुई चर्चा के दौरान कुछ मंत्रियों ने तर्क दिया कि विजय शाह अपने बयान को लेकर कई बार सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं। मंत्रियों के अनुसार, तीन से चार बार माफी मांगे जाने के बाद उनके खिलाफ आगे कार्रवाई की जरूरत नहीं रह जाती।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला, सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला और विधि सचिव मुकेश कुमार मौजूद रहे।
कैबिनेट बैठक के बाद लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह से जब मामले को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि चर्चा के लिए ऐसा कोई एजेंडा नहीं था।
11 मई 2025 को महू में दिया था बयान
विवाद की शुरुआत 11 मई 2025 को हुई थी। महू के रायकुंडा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद उनके बयान को लेकर व्यापक विवाद हुआ और मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचा।
जांच पूरी करने के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित एसआईटी ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(ए) के तहत विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी थी।
जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया था समय
19 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया था कि एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप चुकी है, लेकिन अभियोजन की अनुमति का मामला राज्य सरकार के पास लंबित है। अदालत ने सरकार को निर्णय लेने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। विजय शाह की ओर से मांगी गई माफी को लेकर अदालत ने भी टिप्पणी की थी कि माफी मांगने में काफी देर हो चुकी है।
मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने निर्देशों का पालन करते हुए चार सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा था। इसके बाद 23 जुलाई 2026 की अदालत की ऑफिस रिपोर्ट में सामने आया कि राज्य सरकार की ओर से उस समय तक कोई दस्तावेज दाखिल नहीं किया गया था।
अब राज्यपाल के फैसले पर नजर
कैबिनेट के निर्णय के बाद बैठक की कार्यवाही मुख्यमंत्री के पास जाएगी। इसके बाद मुख्यमंत्री इसे राज्यपाल मंगुभाई पटेल के समक्ष भेजेंगे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्यपाल कैबिनेट के निर्णय से सहमत होते हैं या अभियोजन की अनुमति को लेकर अलग फैसला लेते हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के अनुसार, वर्ष 2003 में पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह के खिलाफ लोकायुक्त ने अभियोजन की अनुमति मांगी थी। उस समय कैबिनेट ने अनुमति नहीं दी थी, लेकिन तत्कालीन राज्यपाल भाई महावीर ने अलग निर्णय लिया था।
तन्खा के मुताबिक, मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने कहा था कि मंत्रियों और पूर्व मंत्रियों से जुड़े मामलों में कैबिनेट के उनके पक्ष में रहने की संभावना को देखते हुए राज्यपाल की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
अब विजय शाह मामले में 31 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उससे पहले राज्यपाल के निर्णय पर सभी की नजर रहेगी।

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