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भोपाल में पहली बार सड़कों पर दिखेगा सेना का शौर्य, आर्मी डे परेड में 50 हजार दर्शकों के शामिल होने की उम्मीद

 

भोपाल में पहली बार आर्मी डे परेड का आयोजन सैन्य क्षेत्र से बाहर आम लोगों के बीच किया जाएगा। 15 जनवरी 2027 को होने वाली इस विशेष परेड में भारतीय सेना के टैंक और अन्य सैन्य वाहन शहर की सड़कों पर अपनी क्षमता और शौर्य का प्रदर्शन करेंगे। आयोजन को देखने के लिए करीब 50 हजार दर्शकों के पहुंचने की संभावना है।

परेड की तैयारियों को लेकर शनिवार को सेना, भोपाल पुलिस, जिला प्रशासन, बिजली कंपनी, लोक निर्माण विभाग, भेल और सीपीए के अधिकारियों ने प्रस्तावित मार्ग और आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। एडीएम महेंद्र कपचे ने गोविंदपुरा थाने से जंबूरी मैदान तक की सड़क का जायजा लिया।

भोपाल को वर्ष 2027 की आर्मी डे परेड के लिए इसी साल मार्च में चुना गया था। पहली बार किसी सैन्य कैंटोनमेंट के बजाय सार्वजनिक स्थान पर आर्मी डे परेड आयोजित की जाएगी। इससे शहर के आम लोगों को सेना के सैन्य उपकरण और अनुशासन को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।

2.4 किलोमीटर सड़क को किया जाएगा मजबूत

परेड के लिए गोविंदपुरा थाने से जंबूरी मैदान तक करीब 2.4 किलोमीटर लंबी सड़क को चौड़ा और मजबूत किया जाएगा। सड़क की चौड़ाई 15 मीटर रखी जाएगी। लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर एससी वर्मा के अनुसार सड़क की मजबूती बढ़ाई जाएगी, ताकि भारी सैन्य टैंकों और वाहनों का वजन आसानी से सहन किया जा सके।

दोनों ओर दर्शकों के लिए होगी व्यवस्था

परेड मार्ग के दोनों ओर करीब 50 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था किए जाने की योजना है। सैन्य वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए मार्ग पर स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए जाएंगे। यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को भी परेड की जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाएगा।

बिजली के पोल और पेड़ हटाए जाएंगे

भारी सैन्य वाहनों के सुचारु आवागमन के लिए मार्ग में आने वाले कुछ बिजली के पोल और पेड़ों को हटाने की तैयारी है। संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचकर जरूरी बदलावों का आकलन कर रहे हैं।

नटराज-हेमा स्कूल मार्ग पर पार्क होंगे सैन्य वाहन

परेड में शामिल होने वाले सैन्य वाहनों को नटराज-हेमा स्कूल मार्ग पर पार्क करने की योजना है। आयोजन से पहले सड़क, बिजली, सुरक्षा और यातायात से जुड़े सभी इंतजाम पूरे किए जाएंगे।

भोपाल में होने वाली यह परेड शहर के लिए खास आयोजन होगी, क्योंकि पहली बार आम नागरिकों को सैन्य कैंटोनमेंट के बाहर सेना के टैंकों और सैन्य वाहनों का प्रदर्शन देखने का अवसर मिलेगा।

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