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भोपाल में आज वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस कॉन्क्लेव, 130 से ज्यादा संस्थानों से लिया जाएगा मध्यप्रदेश के विकास का संकल्प

 

मध्यप्रदेश को वर्ष 2047 तक विकसित और समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में सरकार केंद्रीय और विशेषज्ञ संस्थानों की क्षमता का उपयोग राज्य की जरूरतों के लिए करने की तैयारी में है। इसी उद्देश्य से सोमवार 24 अगस्त को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का विषय कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीट्यूशंस फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 रखा गया है।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस रहेगा। इसके तहत कॉन्क्लेव में शामिल होने वाला प्रत्येक संस्थान मध्यप्रदेश के लिए एक ऐसे काम का संकल्प देने का प्रयास करेगा, जिसे आगे वास्तविक परियोजना के रूप में लागू किया जा सके। सरकार की कोशिश है कि संस्थानों में हो रहे शोध, तकनीकी ज्ञान और विशेषज्ञता का लाभ खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, ऊर्जा, पर्यावरण, कौशल विकास और सामाजिक क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में लिया जाए।

सरकार बताएगी समस्याएं, विशेषज्ञ संस्थान सुझाएंगे रास्ते

इस पहल के जरिए राज्य की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की मदद लेने की योजना है। किसी विभाग के सामने कृषि, स्वास्थ्य, प्रदूषण, तकनीक, कौशल या शहरी विकास से जुड़ी चुनौती होने पर संबंधित संस्थान अपने शोध, तकनीक, विशेषज्ञों और उपलब्ध संसाधनों के जरिए समाधान तैयार करने में सहयोग कर सकता है।

सरकार की योजना सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों, शोध संगठनों, उद्योग और नवाचार से जुड़े क्षेत्रों को एक मंच पर लाने की है। इससे ऐसे प्रोजेक्ट तैयार करने का प्रयास होगा, जिनका लाभ भविष्य में आम लोगों तक पहुंचाया जा सके। हालांकि अभी किसी विशेष परियोजना के माध्यम से नागरिकों को तत्काल लाभ देने की घोषणा नहीं की गई है। आगे किस तरह के काम शुरू होंगे, यह संस्थानों की ओर से दिए जाने वाले संकल्प और उसके बाद होने वाली कार्ययोजना पर निर्भर करेगा।

130 से ज्यादा संस्थानों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

कॉन्क्लेव में प्रदेश में मौजूद 59 केंद्रीय संस्थानों, 26 राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों, 11 शासकीय इंजीनियरिंग संस्थानों, 19 शासकीय मेडिकल कॉलेजों, 8 राज्य स्तरीय शोध संस्थानों और 9 चयनित निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

कार्यक्रम में आईआईटी इंदौर, आईआईएम इंदौर, आईआईएसईआर भोपाल, मैनिट भोपाल, एम्स भोपाल, आईआईआईटी, एनएफएसयू भोपाल, आरआरएसीएटी इंदौर, डीआरडीओ और इसरो सहित कई प्रमुख संस्थानों की भागीदारी रहेगी। कृषि, स्वास्थ्य, तकनीक, प्रबंधन, रक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण और कौशल विकास से जुड़े संस्थानों को भी इस पहल से जोड़ा गया है।

विभाग अपनी प्राथमिकताएं बताएंगे, संस्थान समाधान पर करेंगे चर्चा

कॉन्क्लेव में दोपहर 2 बजे से 3:45 बजे तक समावेशी आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए आगे की कार्ययोजना पर चर्चा होगी। इसमें केंद्रीय संस्थानों, प्रदेश के संस्थानों और राज्य सरकार के अधिकारियों की भागीदारी रहेगी।

इस सत्र में कृषि, उद्यानिकी, पर्यावरण, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, एमएसएमई, नगरीय विकास, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, औद्योगिक विकास, जनजातीय कल्याण और महिला एवं बाल विकास विभाग अपनी चुनौतियां और प्राथमिकताएं सामने रखेंगे।

इस चर्चा का उद्देश्य यह तय करना होगा कि संस्थानों में हो रहे शोध और उपलब्ध तकनीक का इस्तेमाल प्रदेश की वास्तविक समस्याओं के समाधान में किस तरह किया जा सकता है।

एमओयू के बाद संयुक्त शोध और परियोजनाओं की तैयारी

कार्यक्रम में अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान और केंद्रीय संस्थानों के बीच एमओयू का आदान-प्रदान भी किया जाएगा। इन समझौतों के जरिए संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी समाधान, परियोजनाओं और क्षमता निर्माण से जुड़े काम आगे बढ़ाने की योजना है।

इस पहल का असर तत्काल किसी नई सरकारी योजना के रूप में दिखाई देने के बजाय आने वाले समय में नई तकनीक, बेहतर नीतियां, शोध आधारित समाधान और विशेषज्ञ संस्थानों की क्षमता के उपयोग के रूप में सामने आ सकता है।

मुख्यमंत्री से संवाद करेंगे केंद्रीय संस्थानों के प्रमुख

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन होगा। इससे पहले केंद्रीय संस्थानों के प्रमुख मुख्यमंत्री के साथ संवाद करेंगे। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल 2047 के समृद्ध मध्यप्रदेश की विकास परिकल्पना पर मुख्य वक्तव्य देंगे।

इसके बाद एमओयू का आदान-प्रदान और संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा होगी। सरकार का उद्देश्य 2047 तक मध्यप्रदेश के विकास की योजना को केवल सरकारी विभागों तक सीमित न रखते हुए केंद्रीय और विशेषज्ञ संस्थानों को भी इसका सक्रिय भागीदार बनाना है।

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