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फर्जी IAS तृप्ति और भाई से पूछताछ में ठगी के नए मामले सामने आए, नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से ऐंठे रुपए


भोपाल। खुद को कभी आईएएस अधिकारी तो कभी बड़े सरकारी विभाग में पदस्थ अधिकारी बताकर लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देने के आरोप में गिरफ्तार तृप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई सुभाष राजपूत से पूछताछ जारी है। पूछताछ के दौरान पुलिस के सामने ठगी से जुड़े कई नए तथ्य सामने आने की बात कही जा रही है।

आरोप है कि तृप्ति ने अपनी पहचान प्रभावशाली सरकारी अधिकारी के रूप में बताकर युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद उनसे अलग-अलग काम के नाम पर रकम ली गई। पुलिस अब ऐसे लोगों की जानकारी जुटा रही है, जो आरोपियों के संपर्क में आए और उनके झांसे में फंसकर पैसे गंवाने का दावा कर रहे हैं।

कभी आईएएस तो कभी विभागीय अधिकारी होने का दावा

पुलिस जांच में सामने आया है कि तृप्ति कथित तौर पर अलग-अलग लोगों के सामने अपनी पहचान बदलकर पेश करती थी। कभी वह खुद को आईएएस अधिकारी बताती थी तो कभी किसी बड़े सरकारी विभाग में अधिकारी होने का दावा करती थी।

सरकारी पद और प्रभाव का हवाला देकर वह युवाओं को नौकरी दिलाने का भरोसा देती थी। उसके कथित प्रभाव और सरकारी संपर्कों की बातों पर विश्वास कर कुछ लोगों ने उसे रकम भी दी।

भाई की भूमिका भी जांच के घेरे में

तृप्ति के साथ उसके भाई सुभाष राजपूत को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस दोनों से आमने-सामने पूछताछ कर ठगी के नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों ने अब तक कितने लोगों से संपर्क किया और कितने लोगों से नौकरी या अन्य सरकारी काम कराने के नाम पर रकम ली गई।

गिरफ्तारी से पहले साक्ष्य मिटाने का आरोप

पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि गिरफ्तारी की आशंका होने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर मामले से जुड़े साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। अब जांच अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कौन-कौन से दस्तावेज, संदेश, मोबाइल रिकॉर्ड या अन्य सामग्री हटाई गई।

पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और उपलब्ध दस्तावेजों की भी जांच कर रही है, ताकि आरोपियों की गतिविधियों और उनके संपर्कों की पूरी जानकारी सामने लाई जा सके।

युवाओं को नौकरी का दिखाया भरोसा

पूछताछ में यह बात सामने आने की संभावना है कि आरोपियों ने सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को निशाना बनाया। नौकरी लगवाने, सरकारी विभाग में पद दिलाने और अधिकारियों से संपर्क होने का भरोसा देकर उनसे रकम मांगी जाती थी।

अब पुलिस ऐसे पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है, जिन्होंने आरोपियों को नौकरी या अन्य सरकारी कार्य के लिए पैसे दिए थे। सामने आने वाले प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच की जाएगी।

संपर्क में आए लोगों की भी होगी जांच

पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि तृप्ति और सुभाष के संपर्क में कौन-कौन लोग थे। यदि किसी व्यक्ति ने आरोपियों की कथित गतिविधियों में सहयोग किया या उनके लिए लोगों से संपर्क कराया, तो उसकी भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन, दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध सामग्री से महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

ठगी के मामलों की संख्या बढ़ने की संभावना

फिलहाल पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर ठगी से जुड़े और मामले सामने आ सकते हैं। पुलिस पीड़ितों से मिली जानकारी का सत्यापन करने के साथ आरोपियों द्वारा किए गए दावों की भी जांच कर रही है।

पूरे मामले में यह स्पष्ट होने के बाद ही ठगी की वास्तविक रकम, पीड़ितों की संख्या और आरोपियों की भूमिका की पूरी तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल तृप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई सुभाष राजपूत से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।





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