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पीडब्ल्यूडी का नया तरीका: 84.75 करोड़ के अतिरिक्त खर्च के बाद अब जाम और हादसों के आंकड़ों से तय होगी सड़क-फ्लाईओवर की जरूरत


भोपाल। मध्य प्रदेश में सड़क, फ्लाईओवर और एलिवेटेड कॉरिडोर से जुड़ी परियोजनाओं की योजना बनाने के तरीके में बदलाव किया जा रहा है। अब केवल इंजीनियरों के प्रारंभिक सर्वे और अनुमान के आधार पर किसी सड़क की चौड़ाई बढ़ाने या फ्लाईओवर बनाने का निर्णय नहीं लिया जाएगा। लोक निर्माण विभाग यातायात के वास्तविक दबाव का आकलन करने के लिए गूगल मैप्स के व्यस्त समय के यातायात आंकड़ों का भी इस्तेमाल करेगा।

इस व्यवस्था में किसी मार्ग से प्रतिदिन गुजरने वाले वाहनों की संख्या, व्यस्त समय में यातायात का दबाव, सड़क की मौजूदा क्षमता, जाम की स्थिति और दुर्घटनाओं के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। इन सभी पहलुओं के अध्ययन के बाद यह तय किया जाएगा कि किसी मार्ग पर सड़क चौड़ी करना उचित होगा या फ्लाईओवर अथवा एलिवेटेड कॉरिडोर की जरूरत है।

पहले चरण में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रीवा, जबलपुर और ग्वालियर की प्रस्तावित परियोजनाओं का इसी आधार पर परीक्षण किया जा रहा है।

84.75 करोड़ के अतिरिक्त भार के बाद बदली कार्यप्रणाली

सड़क परियोजनाओं की योजना में बदलाव की एक बड़ी वजह नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की वर्ष 2025 में जारी लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रदर्शन जांच रिपोर्ट भी है।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018-19 से 2022-23 के बीच 19 सड़कों से जुड़े मामलों में कुल 446.77 किलोमीटर हिस्से पर सड़क की चौड़ाई 3.75 मीटर से बढ़ाकर 5.50 मीटर कर दी गई। जांच में पाया गया कि अनुमानित यातायात के आधार पर 3.75 मीटर चौड़ाई ही पर्याप्त थी।

चौड़ाई बढ़ाने के निर्णय के कारण सरकार पर 84.75 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा। इसके बाद विभाग ने सड़क निर्माण और विस्तार की आवश्यकता का अधिक वास्तविक आंकड़ों के आधार पर आकलन करने पर जोर दिया है।

छह शहरों की परियोजनाओं से शुरुआत

नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के छह प्रमुख शहरों की सड़क और यातायात परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। इनमें भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रीवा, जबलपुर और ग्वालियर शामिल हैं।

इन शहरों में यातायात के दबाव, जाम वाले स्थानों और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया जा रहा है। इसी आधार पर संबंधित मार्ग के लिए निर्माण की उपयुक्त योजना तैयार की जाएगी।

भोपाल: अयोध्या बायपास और पिपलानी क्षेत्र पर ध्यान

भोपाल में अयोध्या बायपास पर सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। वहीं पिपलानी क्षेत्र में मेट्रो निर्माण के कारण यातायात दबाव बढ़ने की स्थिति का भी अध्ययन किया जा रहा है।

विभाग सड़क की क्षमता बढ़ाने के साथ निर्माण कार्य के दौरान यातायात को वैकल्पिक लेन से संचालित करने की संभावनाओं का भी परीक्षण कर रहा है। व्यस्त समय में वाहनों की संख्या और मार्ग पर पड़ने वाले दबाव को ध्यान में रखते हुए आगे की योजना बनाई जाएगी।

इंदौर: रोबोट और रेडिसन चौराहे पर जाम का अध्ययन

इंदौर में रोबोट चौराहा और रेडिसन चौराहा रिंग रोड के प्रमुख व्यस्त स्थानों में शामिल हैं। यहां व्यस्त समय के दौरान वाहनों को 15 से 30 मिनट तक जाम में फंसे रहने की स्थिति सामने आती है।

इन स्थानों पर फ्लाईओवर की योजना पर काम किया जा रहा है। सड़क चौड़ीकरण की आवश्यकता और उसके प्रभाव का आकलन करने के लिए यातायात के आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि मौजूदा सड़क व्यवस्था में सुधार पर्याप्त होगा या किसी बड़े निर्माण की जरूरत है।

रीवा: 150 करोड़ के फ्लाईओवर का आंकड़ों से परीक्षण

रीवा में ढेकहा तिराहा से कॉलेज चौराहा मार्ग पर करीब 150 करोड़ रुपए की लागत से फ्लाईओवर प्रस्तावित है। विभाग इस परियोजना के लिए यातायात के आंकड़ों का विश्लेषण कर रहा है।

वाहनों की संख्या, जाम की स्थिति और मार्ग की क्षमता का अध्ययन करने के बाद प्रस्तावित संरचना की आवश्यकता और स्वरूप को अंतिम रूप दिया जाएगा।

उज्जैन: सड़क की चौड़ाई को लेकर विरोध

उज्जैन में एमआर-4 और पाटीदार ब्रिज क्षेत्र में 24 मीटर चौड़ी सड़क बनाने की योजना का स्थानीय लोगों ने विरोध किया है। लोगों ने 24 मीटर के बजाय 18 मीटर चौड़ी सड़क किए जाने की मांग रखी है।

विरोध के बाद विभाग अब यातायात के वास्तविक दबाव और भविष्य की आवश्यकता का आकलन कर रहा है। आंकड़ों के आधार पर सड़क की उचित चौड़ाई और निर्माण की आवश्यकता तय की जाएगी।

जबलपुर: मौजूदा फ्लाईओवर के बाद अन्य मार्गों का अध्ययन

जबलपुर में मदनमहल से दमोह नाका तक करीब 7 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर बन चुका है। अब विजय नगर और कटंगी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण की जरूरत का परीक्षण किया जा रहा है।

विभाग इन मार्गों पर वाहनों की संख्या और यातायात के दबाव का अध्ययन कर रहा है। इसके बाद सड़क विस्तार को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

ग्वालियर: बारादरी चौराहे पर फ्लाईओवर प्रस्तावित

ग्वालियर के बारादरी चौराहे पर फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव है। वहीं फूलबाग क्षेत्र में मौजूदा फ्लाईओवर के कारण यातायात प्रभावित होने की स्थिति को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

अब यहां सर्विस रोड को बेहतर बनाने और वैकल्पिक यातायात व्यवस्था तैयार करने की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य केवल नया निर्माण करना नहीं, बल्कि उपलब्ध सड़क व्यवस्था का बेहतर उपयोग करना भी है।

अब जरूरत के हिसाब से होगा निर्माण

लोक निर्माण विभाग की नई कार्यप्रणाली का उद्देश्य सड़क परियोजनाओं को वास्तविक यातायात आवश्यकताओं से जोड़ना है। किसी मार्ग पर वाहनों का दबाव कितना है, जाम कितनी देर रहता है, सड़क की मौजूदा क्षमता कितनी है और वहां दुर्घटनाओं की स्थिति क्या है, इन सभी तथ्यों के आधार पर परियोजना का स्वरूप तय किया जाएगा।

इस बदलाव से उम्मीद है कि भविष्य में सड़क चौड़ीकरण, फ्लाईओवर और एलिवेटेड कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं पर अनावश्यक खर्च से बचा जा सकेगा और जिस स्थान पर जिस तरह के बुनियादी ढांचे की वास्तविक जरूरत है, उसी के अनुरूप योजना तैयार की जा सकेगी।





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