भोपाल। मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह से जुड़े विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर विजय शाह को मंत्री पद से हटाने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित पूरे मंत्रिमंडल को भी बर्खास्त करने की मांग उठाई है।
पटवारी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विजय शाह की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में राज्य सरकार ने उनके खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति नहीं दी। कांग्रेस ने इसे न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल बताया है।
सरकार पर मंत्री को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप
जीतू पटवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच दल ने विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी थी। उनके मुताबिक राज्य सरकार ने इस अनुमति को अस्वीकार कर दिया।
पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार एक मंत्री को राजनीतिक संरक्षण दे रही है और कानूनी प्रक्रिया के रास्ते में बाधा खड़ी कर रही है। उन्होंने कहा कि सेना का सम्मान किसी राजनीतिक दल तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के सम्मान और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ा मामला है।
प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में स्पष्ट रुख बताने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कई मौकों पर सेना, सैनिकों और शहीदों के सम्मान को देश के सर्वोच्च गौरव से जोड़ चुके हैं।
पटवारी का कहना है कि ऐसे में विजय शाह के मामले में प्रधानमंत्री को सामने आकर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राज्य सरकार का फैसला प्रधानमंत्री की सहमति से नहीं हुआ है, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से इस निर्णय से असहमति जाहिर करनी चाहिए।
संवैधानिक व्यवस्था पर उठाए सवाल
पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि मामला अब सिर्फ विजय शाह के बयान तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार अभियोजन की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री और पूरे मंत्रिमंडल की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए संविधान की मर्यादा, न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और भारतीय सेना के सम्मान की रक्षा के लिए संवैधानिक दायित्व निभाने का आग्रह किया।
सुप्रीम कोर्ट की SIT ने मांगी थी अभियोजन की मंजूरी
मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच दल ने जांच के बाद विजय शाह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार से अभियोजन की अनुमति मांगी थी।
राज्य सरकार की ओर से अनुमति नहीं दिए जाने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले को बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दा बना दिया है।
31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
कर्नल सोफिया कुरैशी से जुड़े मामले में अभियोजन की अनुमति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 31 अगस्त को प्रस्तावित है। इससे पहले हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले को लेकर सख्त रुख अपनाया था।
अभियोजन की अनुमति में देरी को लेकर भी अदालत की ओर से सवाल उठाए गए हैं।
11 मई 2025 को महू में दिया था विवादित बयान
विवाद की शुरुआत 11 मई 2025 को हुई थी। जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री विजय शाह ने इंदौर के महू स्थित रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम के दौरान ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर टिप्पणी की थी।
उनकी टिप्पणी के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। बयान को भारतीय सेना की अधिकारी और महिला सम्मान से जोड़कर देखा गया।
विवाद बढ़ने के बाद मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच आगे बढ़ी।
अब राजनीतिक लड़ाई और तेज
अभियोजन की अनुमति को लेकर सरकार के रुख के बाद कांग्रेस ने एक बार फिर विजय शाह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रपति को लिखे पत्र के जरिए जीतू पटवारी ने मंत्री को पद से हटाने के साथ मुख्यमंत्री और पूरे मंत्रिमंडल की बर्खास्तगी की मांग की है।
अब इस मामले में 31 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर रहेगी।

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