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जेवर गिरवी रखे, 22 लाख रुपए दिए फिर भी नहीं छोड़ा, बुजुर्ग दंपती को 96 दिन रखा डिजिटल बंधक


भोपाल। कोलार क्षेत्र में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती को साइबर ठगों ने करीब तीन महीने तक अपने जाल में फंसाए रखा। आरोपियों ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी, मुख्य जांच अधिकारी और सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बताकर दंपती को करोड़ों रुपए के धनशोधन मामले में फंसाने की धमकी दी। ठगों ने दंपती से कहा कि उनके नाम गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है और उनकी संपत्ति जब्त की जा सकती है।

आरोपियों की लगातार धमकियों से भयभीत दंपती ने अपनी जमा पूंजी और जेवर तक दांव पर लगा दिए। उन्होंने जेवर गिरवी रखकर करीब 22 लाख रुपए आरोपियों के बताए खातों में भेज दिए। इसके बावजूद ठगों ने उन्हें राहत नहीं दी और लगातार निगरानी में रहने का दबाव बनाते रहे। करीब 96 दिन तक दंपती को वीडियो कॉल और फोन के जरिए कथित रूप से डिजिटल बंधक बनाकर रखा गया।

पुलिस अधिकारी बनकर शुरू किया संपर्क

ठगों ने दंपती से संपर्क करते समय खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया। बातचीत के दौरान आरोपियों ने दंपती को गंभीर आपराधिक मामले में फंसे होने की बात कही। उन्हें बताया गया कि उनके नाम से धनशोधन से जुड़ा मामला सामने आया है और जांच में उनकी भूमिका संदिग्ध है।

आरोपियों ने दंपती को गिरफ्तारी का भय दिखाते हुए कहा कि यदि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लगातार मिल रही धमकियों के कारण दंपती मानसिक दबाव में आ गए।

कभी जांच अधिकारी तो कभी जज बनकर बात की

साइबर ठगों ने दंपती का भरोसा कायम रखने के लिए अलग-अलग पहचान का सहारा लिया। कभी खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया तो कभी मुख्य जांच अधिकारी बनकर बातचीत की। इसके बाद एक आरोपी ने खुद को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बताकर दंपती को डराया।

ठगों ने दंपती से कहा कि मामला बेहद गंभीर है और उनकी संपत्ति भी जब्त की जा सकती है। आरोपियों ने कथित जांच प्रक्रिया के नाम पर दंपती को लगातार फोन और वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर किया।

गिरफ्तारी वारंट का डर दिखाया

ठगों ने दंपती को बताया कि उनके नाम गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। इसके साथ ही संपत्ति जब्त होने की धमकी भी दी गई। आरोपियों ने ऐसा माहौल बनाया कि दंपती को लगा कि यदि उन्होंने पैसे नहीं दिए तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनकी पूरी संपत्ति सरकार द्वारा जब्त कर ली जाएगी।

डर के कारण दंपती आरोपियों के निर्देशों का पालन करते रहे। इस दौरान उन्हें किसी अन्य व्यक्ति से घटना के बारे में चर्चा करने से भी रोका गया।

जेवर गिरवी रखकर जुटाए 22 लाख रुपए

ठगों के लगातार दबाव के बाद दंपती ने अपनी आर्थिक स्थिति के बावजूद रकम जुटाने की कोशिश की। बताया गया है कि उन्होंने अपने जेवर गिरवी रखे और करीब 22 लाख रुपए जुटाकर आरोपियों के बताए खातों में भेज दिए।

रकम मिलने के बाद भी आरोपियों ने दंपती को नहीं छोड़ा। उनसे आगे भी जांच के नाम पर बातचीत जारी रखी गई। इससे दंपती को लंबे समय तक यह विश्वास बना रहा कि वे वास्तव में किसी कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।

96 दिन तक चलता रहा भय का सिलसिला

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान करीब 96 दिन तक दंपती मानसिक दबाव में रहे। ठग लगातार उन्हें वीडियो कॉल और फोन के माध्यम से अपने संपर्क में रखते थे। उन्हें डर था कि किसी भी समय पुलिस उनके घर पहुंच सकती है और उन्हें गिरफ्तार कर सकती है।

ठगों ने कथित तौर पर दंपती को इस तरह विश्वास में लिया कि उन्होंने परिवार और परिचितों से भी इस संबंध में जानकारी साझा नहीं की। लंबे समय तक चले इस दबाव के कारण दंपती भय और तनाव में रहे।

डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर बनाया निशाना

साइबर अपराधी इन दिनों लोगों को पुलिस, जांच एजेंसियों और न्यायपालिका के अधिकारियों के नाम पर डराकर ठगी कर रहे हैं। इस मामले में भी आरोपियों ने दंपती को कानून की कार्रवाई का भय दिखाकर अपने नियंत्रण में रखा।

ठगों ने कथित जांच के नाम पर दंपती से निजी जानकारी और धन संबंधी विवरण हासिल किए। इसके बाद रकम अलग-अलग माध्यमों से जमा कराने का दबाव बनाया गया।

पुलिस ने लोगों को किया सतर्क

ऐसे मामलों को लेकर पुलिस लगातार लोगों को सावधान रहने की अपील करती रही है। किसी भी पुलिस अधिकारी, जांच एजेंसी या न्यायिक अधिकारी द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे मांगना गंभीर संकेत हो सकता है।

यदि किसी व्यक्ति को इस तरह का फोन आता है तो उसे घबराने के बजाय तत्काल अपने परिजनों को जानकारी देनी चाहिए और संबंधित पुलिस थाने में शिकायत करनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते, ओटीपी, पासवर्ड या धन संबंधी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

कोलार क्षेत्र के बुजुर्ग दंपती के साथ हुई इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि साइबर ठग किस तरह कानून और जांच प्रक्रिया का डर दिखाकर लोगों को लंबे समय तक अपने जाल में फंसा सकते हैं। मामले में पुलिस की जांच के बाद ही ठगी से जुड़े अन्य तथ्यों और आरोपियों की पहचान स्पष्ट हो सकेगी।

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