राष्ट्रीय समाचार

चार महीने बाद भी 15 लाख विद्यार्थियों की 65 लाख किताबें छपाई से बाहर

सरकारी स्कूलों में पढ़ाई शुरू हुए लंबा समय बीता, पांचवीं और सातवीं की कई किताबों की छपाई अब तक शुरू नहीं

मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए चार महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन करीब 15 लाख विद्यार्थियों के लिए जरूरी 65 लाख किताबों की छपाई अब तक शुरू नहीं हो पाई है। पांचवीं कक्षा के सभी विषयों की किताबों के अलावा सातवीं की गणित भाग-दो और सामाजिक विज्ञान भाग-दो की हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू माध्यम की पुस्तकें अभी प्रक्रिया में अटकी हुई हैं।

अधिकारियों के मुताबिक यदि अब भी छपाई का आदेश जारी कर दिया जाता है तो किताबों को स्कूलों तक पहुंचने में करीब तीन महीने का समय लगेगा। ऐसे में नवंबर से पहले विद्यार्थियों को इन पुस्तकों के मिलने की संभावना कम है।

मई में भेजी गई थी मांग

राज्य शिक्षा केंद्र के अपर संचालक डॉ. अरुण सिंह ने मई 2026 में ही आवश्यक किताबों की मांग पाठ्यपुस्तक निगम को भेज दी थी। इसके बाद मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम ने 17 जून को पुस्तकों की छपाई के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की।

तत्कालीन प्रबंध संचालक विनय निगम ने स्थानांतरण से पहले तकनीकी निविदा भी खोल दी थी। इसके बाद केवल वित्तीय निविदा खोलकर कार्यादेश जारी किया जाना बाकी था।

नए प्रबंध संचालक रोहित सिंह के पदभार संभालने के बाद वित्तीय निविदा खोलने और कार्यादेश जारी करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

छपाई और वितरण में तीन महीने लगेंगे

राज्य शिक्षा केंद्र और पाठ्यपुस्तक निगम से जुड़े अधिकारियों के अनुसार कार्यादेश जारी होने के बाद किताबों की छपाई में करीब दो महीने लगेंगे। इसके बाद वितरण के लिए लगभग एक महीने का समय जरूरी होगा।

इस हिसाब से यदि प्रक्रिया तुरंत शुरू भी होती है तो नवंबर से पहले किताबें विद्यार्थियों तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होगा। इससे शैक्षणिक सत्र के एक बड़े हिस्से में विद्यार्थियों को निर्धारित पाठ्य सामग्री के बिना पढ़ाई करनी पड़ सकती है।

पाठ्यपुस्तक निगम के प्रबंध संचालक रोहित सिंह से इस मामले में प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

अगले सत्र की किताबों पर भी असर की आशंका

वर्तमान सत्र की पुस्तकों में देरी के साथ अगले शैक्षणिक सत्र की तैयारियों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। सामान्य तौर पर अगले सत्र की किताबों के लिए जून में निविदा प्रक्रिया शुरू होती है और अगस्त में कार्यादेश जारी किया जाता है।

निविदा दस्तावेज तैयार करने से पहले पाठ्यपुस्तक निगम के बोर्ड की कम से कम दो बैठकें भी आवश्यक होती हैं। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों और प्रक्रिया में हुई देरी को देखते हुए अगले सत्र की किताबें भी सितंबर 2027 तक विद्यार्थियों को मिलने की आशंका है।

हर साल 8 से 9 करोड़ किताबें छापता है निगम

मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम हर साल लगभग 8 से 9 करोड़ किताबों की छपाई करता है। इनकी कुल लागत करीब 100 करोड़ रुपए रहती है।

वर्तमान में जिन 65 लाख किताबों की छपाई लंबित है, उनका भुगतान राज्य शिक्षा केंद्र की ओर से किया जाना है। अब निगाह इस बात पर है कि लंबित निविदा प्रक्रिया कब पूरी होती है और विद्यार्थियों तक किताबें पहुंचाने की व्यवस्था कितनी तेजी से की जाती है।

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