भोपाल। त्योहारों के मौसम में मिलावटी दूध, घी, पनीर, मावा और मिठाइयों पर शिकंजा कसने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने विशेष अभियान चलाया है। 20 जुलाई से 25 अगस्त तक प्रदेशभर में 4,642 खाद्य नमूने जांच के लिए लिए गए। हालांकि प्रयोगशाला जांच की गति अपेक्षाकृत धीमी रहने से अब तक केवल 680 नमूनों की रिपोर्ट ही सामने आई है। शेष 3,962 नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी लंबित है।
यानी कुल लिए गए नमूनों में करीब 85 प्रतिशत की गुणवत्ता अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। दूसरी ओर रक्षाबंधन का त्योहार बीत चुका है और आने वाले दिनों में भी कई पर्व हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिन खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, उनकी रिपोर्ट आने तक यदि संबंधित सामग्री बाजार में बिक चुकी हो तो उपभोक्ता उसकी गुणवत्ता का पता कैसे लगाएगा।
विभाग की ओर से बताया गया है कि नमूनों की जांच रिपोर्ट लगातार प्राप्त हो रही है। लंबित नमूनों की रिपोर्ट भी जल्द आने की उम्मीद जताई गई है।
680 रिपोर्ट में 174 नमूने अमानक
अभियान के दौरान लिए गए 4,642 नमूनों में 2,605 वैधानिक और 2,037 निगरानी नमूने शामिल हैं। राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला ने अब तक 680 नमूनों की जांच पूरी की है। इनमें 174 नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जिन नमूनों की जांच पूरी हुई, उनमें बड़ी संख्या में गुणवत्ता संबंधी खामियां सामने आई हैं। इससे त्योहारों के दौरान बाजार में बिक रहे दूध और उससे बने उत्पादों की शुद्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
आठ शहरों में घी के 25 नमूने असुरक्षित
विशेष अभियान में भोपाल, इंदौर समेत आठ शहरों से लिए गए घी के 25 ब्रांड के नमूने जांच में असुरक्षित पाए गए। कुछ नमूनों में पाम ऑयल सहित अन्य पदार्थों की मिलावट सामने आई है। भोपाल में घी के नौ, इंदौर में सात और उज्जैन में तीन नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके अलावा कटनी, नर्मदापुरम, डिंडौरी, धार और दमोह में भी घी के नमूनों में गड़बड़ी मिली।
विभाग ने असुरक्षित पाए गए घी के निर्माताओं और विक्रेताओं के खिलाफ न्यायालयीन कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। संबंधित राज्यों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजे जा रहे हैं।
नागपुर से आया 166 किलो मिल्क केक भी अमानक
भोपाल के नादरा बस स्टैंड पर जांच के दौरान जब्त किया गया 166 किलो मिल्क केक भी जांच में अमानक पाया गया। यह खेप महाराष्ट्र के नागपुर स्थित मनन स्वीट्स से भोपाल लाई गई थी।
रिपोर्ट सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा नियंत्रक मनोज पुष्प ने नागपुर कलेक्टर को पत्र भेजकर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
इससे यह भी सामने आया कि दूसरे राज्यों से तैयार मिठाइयां और दुग्ध उत्पाद बड़ी मात्रा में मध्य प्रदेश के शहरों तक पहुंच रहे हैं। इनकी गुणवत्ता की जांच को लेकर अब निगरानी बढ़ाई जा रही है।
गुजरात के घी में भी मिली गड़बड़ी
गुजरात के खेड़ा जिले से आए बालाजी डेयरी प्रोडक्ट्स के घी का नमूना जांच में असुरक्षित पाया गया। विभाग ने गुजरात के खाद्य सुरक्षा आयुक्त को पत्र भेजकर संबंधित निर्माता के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है।
दूसरे राज्यों से आने वाले खाद्य पदार्थों में गड़बड़ी सामने आने के बाद प्रदेश में बाहरी आपूर्ति पर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है।
11.73 लाख किलो सामग्री जब्त
अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग ने करीब 11.73 लाख किलोग्राम संदिग्ध और मिलावटी खाद्य सामग्री जब्त की है। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत 5.61 करोड़ रुपए बताई गई है। इसके अलावा प्रतिबंधित एनालॉग पनीर के खिलाफ भी कार्रवाई की गई और 10,835 किलोग्राम सामग्री जब्त की गई।
कार्रवाई के दौरान 18 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस या पंजीयन निरस्त किए गए, जबकि 172 मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं।
अब बसों से आने वाले खाद्य पदार्थों पर भी नजर
दूसरे राज्यों से दूध, मावा, मिठाई और अन्य दुग्ध उत्पाद केवल ट्रांसपोर्ट वाहनों से ही नहीं, बल्कि यात्री बसों के जरिए भी मध्य प्रदेश पहुंच रहे हैं। बाहर से आई खाद्य सामग्री के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को बसों के माध्यम से आने वाले संदिग्ध खाद्य पदार्थों की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
इससे बस स्टैंड और परिवहन मार्गों पर खाद्य सामग्री की निगरानी बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों को संदेह होने पर संबंधित खाद्य पदार्थों के नमूने लेने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
त्योहार बीतने के बाद रिपोर्ट आने की चिंता
सबसे बड़ा सवाल जांच की गति को लेकर है। विभाग ने 4,642 नमूने लिए, लेकिन अब तक केवल 680 की रिपोर्ट उपलब्ध हुई है। 3,962 नमूनों की रिपोर्ट आने का इंतजार है।
त्योहारों के दौरान दूध, घी, पनीर, मावा और मिठाइयों की मांग अचानक बढ़ जाती है। ऐसे में यदि किसी दुकान या प्रतिष्ठान से लिया गया नमूना अमानक निकलता है, तो उसकी रिपोर्ट आने तक संबंधित सामग्री की बिक्री हो चुकी होने की संभावना रहती है। यही वजह है कि नमूना लेने के साथ उसकी जांच और रिपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया भी समयबद्ध रखने की जरूरत महसूस की जा रही है।
विभाग का दावा, लंबित रिपोर्ट जल्द आएगी
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिवराज पावक के अनुसार नमूनों की जांच रिपोर्ट क्रमशः प्राप्त हो रही है। जरूरी जांचों की रिपोर्ट सामने आ रही हैं और जो नमूने लंबित हैं, उनकी रिपोर्ट भी जल्द मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल विभाग का अभियान जारी है। त्योहारों के बीच खाद्य सामग्री की जांच बढ़ाए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में रिपोर्ट लंबित होने से उपभोक्ताओं के सामने यह सवाल बना हुआ है कि बाजार में बिकने वाली सामग्री की गुणवत्ता की पुष्टि समय रहते कैसे हो। आने वाले दिनों में लंबित नमूनों की रिपोर्ट और उनके आधार पर होने वाली कार्रवाई इस अभियान की प्रभावशीलता तय करेगी।

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