मध्य प्रदेश की एक कराटे खिलाड़ी से जुड़े मामले ने खेल जगत और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। आरोप है कि कराटे में आगे बढ़ने का सपना लेकर ट्रेनिंग एकेडमी पहुंची खिलाड़ी को उसके कोच ने भरोसे में लिया और बाद में उसका शोषण किया। मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि टूर्नामेंट में हिस्सा दिलाने के नाम पर खिलाड़ी को मलेशिया ले जाया गया और वहां उसके साथ गलत काम किया गया।
बताया गया है कि खिलाड़ी छोटे शहर से आती थी और कराटे में राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का सपना देख रही थी। इसी उद्देश्य से वह गुना की एक ट्रेनिंग एकेडमी में अभ्यास करने पहुंची। यहीं उसकी मुलाकात कोच जगवीर जाटव और सचिन भटनागर से हुई।
आरोपों के मुताबिक, प्रशिक्षण के दौरान कोच ने खिलाड़ी का भरोसा हासिल किया। इसके बाद उसके साथ आपत्तिजनक हरकतें की गईं और कथित तौर पर उसका अश्लील वीडियो भी बनाया गया। वीडियो के जरिए उसे डराने और दबाव में रखने का आरोप है।
टूर्नामेंट के नाम पर मलेशिया ले जाने का आरोप
मामले में आरोप लगाया गया है कि खिलाड़ी को खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का अवसर देने की बात कहकर मलेशिया ले जाया गया। विदेश पहुंचने के बाद उसके साथ परिस्थितियां बदल गईं और कथित तौर पर उसे अपनी इच्छा के खिलाफ गलत काम करने के लिए मजबूर किया गया।
परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, खिलाड़ी लंबे समय तक इस स्थिति से बाहर नहीं निकल सकी। वीडियो और अन्य दबाव के कारण वह किसी से खुलकर अपनी बात नहीं कह पा रही थी।
करीब तीन साल बाद बाहर निकलने का दावा
मामले से जुड़े विवरण के अनुसार, खिलाड़ी करीब तीन साल तक इस कथित शोषण और दबाव की स्थिति में रही। बाद में वह किसी तरह आरोपियों के चंगुल से बाहर निकलने में सफल हुई और अपने साथ हुई घटनाओं की जानकारी सामने आई।
घटना सामने आने के बाद पुलिस से शिकायत और कानूनी कार्रवाई की बात सामने आई है। मामले में आरोपों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान पुलिस द्वारा खिलाड़ी के बयान, उपलब्ध डिजिटल सामग्री और विदेश यात्रा से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा सकती है।
खेल के सपने से शुरू हुई कहानी
खिलाड़ी का सपना कराटे के क्षेत्र में आगे बढ़कर बड़ी प्रतियोगिताओं में देश और प्रदेश का प्रतिनिधित्व करना था। इसी सपने के चलते उसने प्रशिक्षण के लिए एकेडमी का रुख किया था। लेकिन आरोप है कि खेल प्रशिक्षण से जुड़े भरोसे का फायदा उठाकर उसके साथ गंभीर अपराध किया गया।
यह मामला खिलाड़ियों, विशेषकर कम उम्र के खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। खेल संस्थानों में प्रशिक्षकों की भूमिका, खिलाड़ियों के साथ उनके व्यवहार और बाहर होने वाली प्रतियोगिताओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर निगरानी की जरूरत पर भी चर्चा तेज हो गई है।
फिलहाल पूरे मामले में सामने आए आरोपों की कानूनी जांच महत्वपूर्ण है। आरोप साबित होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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