भोपाल। मध्यप्रदेश में काम कर रहीं करीब 3.5 लाख गैर-सरकारी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, शिक्षण समितियों और ट्रस्टों की निगरानी अब ऑनलाइन की जाएगी। रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटीज ने इन संस्थाओं की वार्षिक जानकारी जमा करने की व्यवस्था को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। इससे संस्थाओं के कामकाज और उनके वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी को डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत संस्थाओं को हर साल अपने कामकाज से जुड़ी जानकारी के साथ खर्च और अन्य आवश्यक विवरण ऑनलाइन जमा करना होगा। इसका उद्देश्य संस्थाओं की गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ाना और लंबे समय से केवल कागजों पर संचालित हो रही संस्थाओं की पहचान करना है।
काम नहीं करने वाली संस्थाओं पर रहेगी नजर
प्रदेश में बड़ी संख्या में संस्थाएं अलग-अलग सामाजिक, शैक्षणिक और जनहित से जुड़े कार्यों के लिए पंजीकृत हैं। इनमें कई संस्थाएं नियमित रूप से सक्रिय हैं, जबकि कुछ के लंबे समय से काम नहीं करने के बावजूद उनका पंजीयन बना हुआ है।
ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी संस्थाओं की पहचान करना आसान होगा। जो संस्थाएं नियमित रूप से अपनी वार्षिक जानकारी जमा नहीं करेंगी या निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करेंगी, उनके रिकॉर्ड की जांच की जा सकेगी।
खर्च का भी देना होगा हिसाब
संस्थाओं के लिए केवल गतिविधियों की जानकारी देना ही पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें अपने खर्च और काम से संबंधित जरूरी विवरण भी ऑनलाइन उपलब्ध कराना होगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि संस्था किस तरह की गतिविधियां कर रही है और उसके संसाधनों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है।
डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से विभाग के स्तर पर जानकारी को सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर किसी संस्था का रिकॉर्ड देखना भी आसान होगा।
कागजी प्रक्रिया कम होगी
अब तक संस्थाओं से जुड़ी कई प्रक्रियाओं में दस्तावेजों और कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता रहती थी। ऑनलाइन व्यवस्था से इस प्रक्रिया में बदलाव आएगा। संस्थाओं को अपनी वार्षिक जानकारी डिजिटल माध्यम से जमा करनी होगी, जिससे रिकॉर्ड को एक ही व्यवस्था में रखा जा सकेगा।
इस व्यवस्था से विभाग को प्रदेश में पंजीकृत संस्थाओं की गतिविधियों पर नजर रखने में सुविधा होगी। साथ ही संस्थाओं के लिए भी अपनी जानकारी जमा करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
3.5 लाख संस्थाएं निगरानी के दायरे में
प्रदेश में करीब 3.5 लाख एनजीओ, सामाजिक संगठन, शिक्षण समितियां और ट्रस्ट पंजीकृत हैं। इतनी बड़ी संख्या में संस्थाओं के रिकॉर्ड की ऑनलाइन निगरानी से विभाग के पास इनकी गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा।
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर उन संस्थाओं पर पड़ने की संभावना है, जो केवल कागजों पर अस्तित्व में हैं। नियमित जानकारी जमा नहीं करने वाली और लंबे समय से निष्क्रिय संस्थाओं के रिकॉर्ड की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने का मुख्य उद्देश्य संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता लाना है। वार्षिक जानकारी ऑनलाइन मिलने से विभाग के पास संस्थाओं की गतिविधियों और वित्तीय विवरण से संबंधित जानकारी उपलब्ध रहेगी। इससे सक्रिय और निष्क्रिय संस्थाओं के बीच अंतर करने में भी मदद मिलेगी।
रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटीज की इस व्यवस्था के बाद अब संस्थाओं को अपने रिकॉर्ड और वार्षिक जानकारी समय पर अपडेट रखने पर विशेष ध्यान देना होगा। आने वाले समय में ऑनलाइन निगरानी के आधार पर कागजों तक सीमित संस्थाओं पर कार्रवाई का रास्ता भी साफ हो सकता है।

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