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आवासीय भूखंडों पर कारोबार को लेकर व्यापारी और प्रशासन आमने-सामने

रहवासी भूखंडों पर चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर व्यापारी और प्रशासन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। व्यापारियों ने मिक्स्ड लैंड यूज लागू करने और नियमितीकरण की नई नीति बनने तक सीलिंग की कार्रवाई रोकने की मांग की है। वहीं प्रशासन का कहना है कि मौजूदा नियमों और न्यायालय के निर्देशों के तहत कार्रवाई करना जरूरी है।

नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन के अनुसार, आवासीय भू उपयोग वाले भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने के मामलों में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। नई नीति आने तक इसे रोकना संभव नहीं है।

व्यापारियों के तर्क और प्रशासन का पक्ष

1. कर और लाइसेंस लेने के बावजूद कारोबार अवैध कैसे?
व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम वर्षों से व्यावसायिक कर और ट्रेड लाइसेंस शुल्क लेता रहा है। बिजली कंपनी ने भी व्यावसायिक दरों पर बिल जारी किए हैं। ऐसे में कारोबार को अवैध कैसे माना जा सकता है।

प्रशासन का जवाब है कि व्यावसायिक कर, ट्रेड लाइसेंस या बिजली कनेक्शन से भूमि उपयोग में बदलाव को कानूनी मंजूरी नहीं मिलती। ये व्यवस्थाएं भूमि उपयोग परिवर्तन या भवन निर्माण की वैधता का विकल्प नहीं हैं।

2. अनुमति देने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो
व्यापारियों ने सवाल उठाया कि यदि लंबे समय तक विभिन्न विभागों से अनुमतियां मिलती रहीं तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की गई।

प्रशासन के अनुसार बिजली कनेक्शन, संपत्ति कर और ट्रेड लाइसेंस की प्रक्रियाएं अलग-अलग नियमों के तहत संचालित होती हैं। इनके आधार पर भूमि उपयोग परिवर्तन को वैध नहीं माना जा सकता।

3. नियमितीकरण की नीति लागू की जाए
व्यापारियों ने गुजरात में लागू की गई व्यवस्था की तर्ज पर प्रभाव शुल्क, जुर्माना या कंपाउंडिंग शुल्क लेकर पुराने निर्माण और कारोबार को नियमित करने की मांग की है।

प्रशासन का कहना है कि यदि सरकार नई नियमितीकरण नीति बनाती है तो उसी के अनुसार आगे निर्णय लिया जाएगा। तब तक मौजूदा नियमों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।

4. पुराने कारोबार को हटाने के लिए समय मिले
व्यापारियों का कहना है कि कई प्रतिष्ठान वर्षों से संचालित हैं। अचानक कार्रवाई से पहले कारोबार समेटने या वैकल्पिक स्थान तलाशने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

प्रशासन के अनुसार संबंधित लोगों को दस्तावेज प्रस्तुत करने और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। चेतावनी के बाद अंतिम नोटिस जारी किए गए और उसके बाद ही सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है।

5. प्रमुख सड़कों पर मिक्स्ड लैंड यूज की अनुमति हो
व्यापारियों ने मांग रखी है कि बड़े शहरों की तर्ज पर 60 या 80 फीट से अधिक चौड़ी सड़कों के किनारे आवासीय भूखंडों के भूतल पर सीमित व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जाए।

प्रशासन का कहना है कि भूमि उपयोग में बदलाव का अधिकार नगर निगम के पास नहीं है। इसलिए निगम अपने स्तर पर आवासीय भूखंडों को व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं दे सकता।

6. पहले नीति बने, फिर सीलिंग हो
व्यापारियों ने कहा कि सरकार को पहले मिक्स्ड लैंड यूज, नियमितीकरण और वैकल्पिक व्यावसायिक स्थानों पर निर्णय लेना चाहिए। तब तक कार्रवाई रोक दी जाए।

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी कर कार्रवाई रोकना संभव नहीं है। नई नीति बनने तक वर्तमान नियमों के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

7. कारोबार बंद होने से रोजगार प्रभावित होगा
व्यापारियों का दावा है कि कार्रवाई के दायरे में 60 हजार से अधिक प्रतिष्ठान आ सकते हैं। इससे कारोबारियों की पूंजी के साथ बड़ी संख्या में कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है।

प्रशासन का कहना है कि रहवासियों के अधिकारों की रक्षा भी जरूरी है। आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से शांति, सुरक्षा, पार्किंग और नागरिक सुविधाओं पर असर पड़ रहा है।

8. नया मास्टर प्लान क्यों नहीं आया
व्यापारियों ने कहा कि शहर में वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ। इस दौरान आबादी बढ़ी, लेकिन व्यावसायिक क्षेत्रों का विस्तार अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ। इसी वजह से कई लोगों ने आवासीय क्षेत्रों में कारोबार शुरू किया।

प्रशासन का तर्क है कि मास्टर प्लान में देरी से नियमों का उल्लंघन वैध नहीं हो जाता। मौजूदा मास्टर प्लान, भवन अनुमति और भूमि विकास से जुड़े प्रावधानों का पालन करना जरूरी है।

आगे की राह पर नजर

पूरे मामले में अब व्यापारियों की नजर सरकार की प्रस्तावित नियमितीकरण और मिक्स्ड लैंड यूज नीति पर है। वहीं प्रशासन न्यायालय के निर्देशों और मौजूदा नियमों के तहत कार्रवाई जारी रखने की बात कह रहा है। ऐसे में समाधान के लिए नीति स्तर पर निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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