दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में खलबली मच गई है। हार की वजहों की परतें खोलने के लिए पार्टी ने भोपाल में एक बेहद अहम और बड़ी समीक्षा बैठक बुलाई है। इस बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और दोनों डिप्टी सीएम समेत लगभग 20 वरिष्ठ नेता शामिल होकर चुनावी हार की अंदरूनी रिपोर्ट खंगाल रहे हैं।
आज होने वाली कैबिनेट बैठक से ठीक पहले रखी गई इस समीक्षा बैठक में इस बात पर विचार हो रहा है कि आख़िर इतनी बड़ी फौज उतारने के बाद भी नतीजा उल्टा कैसे पड़ गया?
100 से ज़्यादा दिग्गज उतरे, फिर भी हार नहीं टली
दतिया का उपचुनाव जीतने के लिए बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। केंद्रीय मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, चुनाव प्रभारी भरत सिंह कुशवाह, प्रदेश महासचिव राहुल कोठारी, डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा और मंत्री राव उदय प्रताप सिंह व राकेश शुक्ला समेत 100 से भी ज़्यादा नेताओं ने प्रचार की कमान संभाली थी।
इतने बड़े चुनावी प्रबंधन और बड़े चेहरों की मौजूदगी के बावजूद परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। 3 अगस्त को हुई मतगणना में कांग्रेस के उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों के अंतर से हरा दिया।
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घनश्याम सिंह (कांग्रेस): 66,757 वोट
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आशुतोष तिवारी (बीजेपी): 60,741 वोट
नतीजों के तुरंत बाद प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साफ कर दिया कि पार्टी हार की एक-एक वजह की गहराई से समीक्षा करेगी और भितरघात या अनुशासनहीनता करने वालों पर गाज गिरना तय है।
पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ पर पिछड़ी पार्टी
इस चुनाव में बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चिंता और झटके की बात यह रही कि पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा के अपने स्थानीय पोलिंग बूथ पर भी पार्टी उम्मीदवार पिछड़ गया। जिस इलाके को पार्टी का सबसे मजबूत किला माना जाता था, वहां से बढ़त न मिलना संगठन की रणनीति पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। बैठक में इस मुद्दे पर विशेष रूप से रिपोर्ट मांगी गई है।
शहरी क्षेत्र में बड़ा झटका: 20-25 पार्षदों की भूमिका संदिग्ध
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बीजेपी को उम्मीद थी कि दतिया के शहरी इलाके आशुतोष तिवारी को एकतरफ़ा वोट दिलाएंगे। लेकिन नतीजे बिल्कुल उलट रहे:
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शहरी इलाका: आशुतोष तिवारी दतिया शहर से 11,000 से ज्यादा वोटों के बड़े अंतर से पीछे रह गए।
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ग्रामीण इलाका: ग्रामीण क्षेत्रों में बीजेपी को करीब 5,000 वोटों की बढ़त मिली थी, लेकिन शहर के नुकसान ने पूरी बाज़ी पलट दी।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि दतिया नगर निगम/परिषद के लगभग 20 से 25 पार्षदों और जिलाध्यक्ष समेत कई स्थानीय पदाधिकारियों ने अंदर ही अंदर पार्टी के खिलाफ काम किया। समीक्षा बैठक के बाद भितरघात करने वाले इन नेताओं और पार्षदों के खिलाफ निलंबन और निष्कासन जैसी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
आगे की रणनीति और कड़ा संदेश
बीजेपी के वरिष्ठ नेतृत्व का मानना है कि पार्टी में अनुशासन सबसे ऊपर है। चुनाव के दौरान जिस तरह से अंदरूनी खींचतान और निष्क्रियता देखने को मिली है, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। भोपाल में चल रही इस उच्चस्तरीय बैठक से यह साफ संदेश दिया जा रहा है कि भितरघात करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, ताकि भविष्य के चुनावों में संगठन को फिर से एकजुट किया जा सके।
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