राष्ट्रीय समाचार

रत में E20 पेट्रोल का विरोध क्यों बढ़ रहा है? वाहन चालकों की चिंताएं और सामने आ रहे बड़े कारण



भारत में पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत एथेनॉल के मिश्रण यानी E20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों के बीच चिंता और नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। खासकर वे लोग ज्यादा परेशान हैं जिनकी गाड़ियां 2023 से पहले की बनी हुई हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक इस नए ईंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं, आइए जानते हैं कि इसका विरोध क्यों हो रहा है और इसके पीछे क्या मुख्य वजहें हैं:


 

1. गाड़ियों का माइलेज कम होना

वाहन चालकों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों की ईंधन दक्षता (Mileage) में गिरावट आई है।


 

  • एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले थोड़ी कम होती है, जिसके कारण गाड़ियां कम माइलेज दे रही हैं।


     

  • कई स्वतंत्र सर्वे और वाहन मालिकों का दावा है कि पुरानी गाड़ियों में माइलेज पहले की तुलना में काफी कम हो गया है, जिससे रोजमर्रा के खर्च बढ़ गए हैं।


     

2. पुराने वाहनों के इंजन और पार्ट्स पर असर


यह विरोध मुख्य रूप से उन लोगों की तरफ से आ रहा है जिनके पास पुरानी या प्री-2023 मॉडल की गाड़ियां हैं:


 

  • रबर और प्लास्टिक के पार्ट्स का खराब होना: जानकारों और रिपोर्ट्स के अनुसार, एथेनॉल एक ड्राई और संक्षारक (Corrosive) प्रकृति का ईंधन है। इसकी वजह से पुरानी गाड़ियों के इंजन में लगे रबर की नली (Hoses), सील, गैस्केट और फ्यूल पंप जल्दी खराब या क्रैक हो रहे हैं।

     

  • जंग और कोरोजन की समस्या: एथेनॉल नमी (Moisture) को जल्दी आकर्षित करता है, जिससे मेटल के टैंक और अंदरूनी हिस्सों में जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है।

     

3. मेंटेनेंस और रिपेयरिंग का बढ़ता खर्च

वाहन मालिकों का कहना है कि फ्यूल सिस्टम से जुड़ी समस्याओं के कारण उन्हें बार-बार मैकेनिक के पास जाना पड़ रहा है। फ्यूल Injectors के चोक होने और स्पार्क प्लग जल्दी खराब होने जैसी परेशानियों के चलते मेंटेनेंस का खर्च काफी बढ़ गया है।

 

4. विकल्प की कमी और अचानक बदलाव का मुद्दा


विरोध करने वालों और वाहन विशेषज्ञों का यह भी तर्क है कि सरकार का यह कदम पर्यावरण और कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए भले ही सही हो, लेकिन इसका ट्रांजिशन बहुत तेजी से किया गया।

  • पेट्रोल पंपों पर सामान्य शुद्ध पेट्रोल या कम एथेनॉल वाले विकल्प की कमी के कारण उपभोक्ताओं कोमजबूरी में यही ईंधन डलवाना पड़ रहा है।


     

  • पुरानी गाड़ियों के मालिकों का मानना है कि जब उनके वाहन इस नए मिश्रण के हिसाब से डिजाइन ही नहीं किए गए थे, तो उन पर इसे थोपने से उनकीमती संपत्तियों (गाड़ियों) को नुकसान पहुंच रहा है।

✍️ प्रतिक्रिया दें (Leave a Comment)