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बुक रिव्यू- अंतरिक्ष से पृथ्वी कैसी दिखती है: सीमाओं, राजनीति और युद्ध से परे दुनिया को देखने का नया नजरिया देती बुकर विजेता किताब 'ऑर्बिटल'


आपने कभी सोचा है कि अंतरिक्ष से पृथ्वी कैसी दिखती होगी? वहां से न तो अलग-अलग राज्यों और सीमाओं के नक्शे दिखाई देते हैं, न राजनीति, न युद्ध और न ही इंसानों द्वारा बनाए गए बंटवारे। वहां से केवल एक नीला और जीवंत ग्रह दिखाई देता है, जिस पर पूरी मानव जाति एक साथ निवास करती है। मशहूर लेखिका समैंथा हार्वी की चर्चित किताब 'ऑर्बिटल' इसी खास नजरिए से दुनिया को देखने और समझने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है।

वर्ष 2024 में प्रतिष्ठित 'बुकर पुरस्कार' से सम्मानित हो चुकी यह किताब इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में मौजूद छह अंतरिक्ष यात्रियों के एक दिन यानी 24 घंटों की कहानी को बयां करती है। इन 24 घंटों के दौरान वे पृथ्वी के कुल 16 चक्कर पूरा करते हैं।

किताब में क्या है खास?

'ऑर्बिटल' की पूरी कहानी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में तैनात छह अंतरिक्ष यात्रियों के इर्द-गिर्द घूमती है। इनमें रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, इटली और जापान के यात्री शामिल हैं। वे स्टेशन पर वैज्ञानिक प्रयोग करते हैं, जटिल तकनीकों और मशीनों की निगरानी करते हैं और हर 90 मिनट में पूरी पृथ्वी का एक चक्कर लगाते हैं। इस तरह 24 घंटे के एक पूरे दिन में वे 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त के साक्षी बनते हैं।

कहानी में बाहरी घटनाक्रम बहुत कम है, लेकिन यात्रियों के मन के भीतर लगातार विचारों का मंथन चलता रहता है। कोई अपनी बीमार मां को याद कर रहा है, कोई अपने परिवार की सुरक्षा के बारे में सोच रहा है, तो कोई खिड़की से नीचे पृथ्वी पर बन रहे विशाल समुद्री तूफान को देख रहा होता है।

इस किताब की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां अंतरिक्ष को केवल रोमांच या एडवेंचर का माध्यम नहीं बनाया गया है। लेखिका ने अंतरिक्ष को एक ऐसे अवलोकन केंद्र की तरह इस्तेमाल किया है, जहां से पूरी मानव सभ्यता को एक नए और गहरे नजरिए से देखा जा सकता है।

किताब का सबसे असरदार पहलू: एक दार्शनिक दृष्टिकोण

'ऑर्बिटल' की सबसे बड़ी ताकत इसका अलग नजरिया है। अंतरिक्ष पर लिखी गई अधिकांश किताबें आमतौर पर रॉकेट तकनीक, जटिल अभियानों या खतरे से भरे रोमांच पर केंद्रित होती हैं। इसके विपरीत, समैंथा हार्वी अंतरिक्ष को एक गहरे दार्शनिक दृष्टिकोण से देखती हैं। उनके लिए अंतरिक्ष का सफर पृथ्वी और उस पर रहने वाले जीवन को गहराई से समझने का एक माध्यम है।

जब ये छह यात्री खिड़की से नीचे झांकते हैं, तो उन्हें ज़मीन पर खिंची कोई सीमा नहीं दिखती। उन्हें केवल विशाल नीले समुद्र, बर्फ से ढके पहाड़, घने जंगल, तैरते बादल और मौसम के बदलते रंग दिखाई देते हैं। यह किताब पाठक के मन में सवाल उठाती है कि जिन सीमाओं, विवादों और आपसी संघर्षों में इंसान जिंदगी भर उलझा रहता है, क्या वे सचमुच उतने महत्वपूर्ण हैं, जितना हम उन्हें मानते हैं?

इसके साथ ही, लेखिका पर्यावरण के संवेदनशील मुद्दे को भी बहुत प्रमुखता से उठाती हैं। अंतरिक्ष से दिखाई देने वाली पृथ्वी जितनी खूबसूरत लगती है, उतनी ही वह बेहद नाजुक और संवेदनशील भी प्रतीत होती है।

किताब के कुछ अमिट और याद रह जाने वाले प्रसंग

  • खिड़की से दिखता अनूठा दृश्य: किताब का सबसे यादगार प्रसंग वह है, जब सभी छह यात्री स्पेस स्टेशन की खिड़कियों के पास शांत खड़े होकर नीचे देखते हैं। हर 90 मिनट में उनके सामने एक नया नजारा होता है। कहीं दिन की पहली किरण फूट रही होती है, कहीं रात का अंधेरा छा रहा होता है, तो कहीं ऑरोरा की रंगीन रोशनी पृथ्वी के ऊपर एक चादर की तरह तैर रही होती है।

  • प्राकृतिक आपदा की लाचारी: फिलीपींस की ओर बढ़ते एक विनाशकारी समुद्री तूफान (टाइफून) का जिक्र किताब में बार-बार आता है। यात्री उसे ऊपर से आकार लेते और आगे बढ़ते हुए देखते हैं। वे जानते हैं कि नीचे लाखों लोगों का जीवन प्रभावित होने वाला है, लेकिन वे चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते और केवल एक गवाह बने रहते हैं। यह दृश्य कुदरत की विशाल ताकत और इंसान की सीमाओं का अहसास कराता है।

  • शून्य गुरुत्वाकर्षण की दिनचर्या: गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण स्पेस स्टेशन के भीतर खाना खाना, सोना, पानी पीना या शरीर का संतुलन बनाए रखना भी पूरी तरह से बदल जाता है। इन छोटी-छोटी रोजमर्रा की बातों को समैंथा हार्वी ने बहुत ही बारीकी से उभारा है।

भाषा शैली और अनुवाद की गुणवत्ता

लेखिका समैंथा हार्वी ने अंतरिक्ष से जुड़े जटिल और तकनीकी विषयों को बहुत ही सहज और सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। किताब में वैज्ञानिक तथ्य और जानकारियां शामिल हैं, लेकिन इसका प्रवाह कभी भी किसी रूखी पाठ्यपुस्तक जैसा नहीं लगता।

किताब का हिंदी अनुवाद डॉ. रोहिणी ने किया है। अनुवाद में मूल रचना की संवेदनशीलता, भाव और लय पूरी तरह बरकरार रहती है। पढ़ते समय यह अनुभव ही नहीं होता कि यह किसी विदेशी भाषा से अनुवादित की गई रचना है।

किताब की प्रमुख खूबियां और सीमाएं

खूबियां सीमाएं
नया नजरिया: मानव जीवन और पृथ्वी को देखने का एक अनूठा और गहरा दृष्टिकोण देती है। धीमी रफ्तार: पारंपरिक उपन्यासों की तरह इसमें कोई तेज गति की कहानी या नाटकीय मोड़ नहीं हैं।
संवेदनाओं का संगम: प्रकृति, पर्यावरण और मानवीय भावनाओं को बहुत ही सहजता से पिरोया गया है। विचारों की प्रधानता: कुछ स्थानों पर दार्शनिक विचार और आत्मचिंतन बहुत अधिक हो जाते हैं।
काव्यात्मक भाषा: भाषा सरल, प्रभावशाली और कई स्थानों पर काव्यात्मक प्रतीत होती है। धैर्य की आवश्यकता: इसे एक बार में जल्दी पढ़ने के बजाय धीरे-धीरे समझकर पढ़ना अधिक प्रभावी होता है।

यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए?

'ऑर्बिटल' उन गिने-चुने ग्रंथों में से है, जो पढ़ने के बाद इंसान के सोचने का नजरिया हमेशा के लिए बदल देती है। यह हमें याद दिलाती है कि अंतरिक्ष में जाने का मुख्य उद्देश्य केवल अन्य ग्रहों की खोज करना ही नहीं है, बल्कि अपनी खुद की पृथ्वी को बेहतर ढंग से समझना और संभालना भी है। यदि आप ऐसी रचनाएं पसंद करते हैं जो जीवन, अस्तित्व और कुदरत से जुड़े बड़े सवाल उठाती हैं, तो यह किताब आपको जरूर पढ़नी चाहिए।

क्या आपको लगता है कि सीमाओं और विवादों से ऊपर उठकर इंसानों को पृथ्वी को एक साझा घर की तरह देखना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें!

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