उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ता ट्रैफिक, पर्यावरण प्रदूषण और डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतें आम जनता के साथ-साथ सरकार के सामने भी बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। इन समस्याओं से प्रभावी तरीके से निपटने और प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट को डीजल से पूरी तरह इलेक्ट्रिक (ई-मोबिलिटी) की ओर शिफ्ट करने की तेज तैयारी कर ली है। ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर योजनाएं लागू की हैं।
वर्तमान में कितनी ई-बसें संचालित हो रही हैं?
राज्य में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की स्थिति पर नजर डालें तो परिवहन निगम के बेड़े में वर्तमान में चुनिंदा प्रमुख शहरों को मिलाकर लगभग 200 इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जा रही हैं। यह सुविधा फिलहाल लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, आगरा और नोएडा जैसे बड़े शहरों और धार्मिक स्थलों तक सीमित है, जहां इसके लिए जरूरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से उपलब्ध है। इन सभी बसों को आधुनिक सुविधाओं से लैस वातानुकूलित (AC) रखा गया है ताकि यात्रियों को आरामदायक सफर मिल सके।
उत्तर प्रदेश सरकार का आगामी प्लान और बड़े लक्ष्य
डीजल पर निर्भरता खत्म करने और पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने आने वाले वर्षों के लिए एक ठोस और व्यापक रोडमैप तैयार किया है:
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5,000 इलेक्ट्रिक बसों का लक्ष्य: राज्य सरकार ने चरणबद्ध तरीके से अपनी इस बेड़े की क्षमता को बढ़ाते हुए आने वाले समय में इनकी संख्या को लगभग 5,000 ई-बसों तक पहुंचाने का बड़ा लक्ष्य रखा है। इसके लिए निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) और नए अनुबंधों के तहत टेंडर प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
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कैबिनेट की नई मंजूरी और फंड: हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल ने परिवहन निगम के बेड़े को और मजबूत करने के लिए भारी-भरकम बजट के साथ नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को मंजूरी दी है, ताकि सुदूर रूटों और धार्मिक-पर्यटक स्थलों पर भी इनका विस्तार किया जा सके।
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चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार: सिर्फ बसें बढ़ाने के बजाय पूरे प्रदेश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार ने विभिन्न जिलों के डिपो में अत्याधुनिक चार्जिंग स्टेशन और पावर सब-स्टेशन स्थापित करने के लिए करोड़ों रुपये के फंड स्वीकृत किए हैं, ताकि बसों के संचालन में कोई बाधा न आए।
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एनसीआर और प्रदूषण नियंत्रण के नियम: दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के बढ़ते प्रदूषण और सख्त मानकों (जैसे सीएक्यूएम के दिशा-निर्देश) को ध्यान में रखते हुए गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों में डीजल बसों की जगह पूरी तरह से इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों के संचालन पर जोर दिया जा रहा है, जिससे तय समयसीमा के भीतर प्रदूषण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में उठाया गया यह कदम न केवल यात्रियों के सफर को सुगम और आरामदायक बनाएगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को प्रदूषण मुक्त और हरित राज्य बनाने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।

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