भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) खिलाड़ियों के बार-बार चोटिल होने की समस्या को लेकर अब काफी सख्त नजर आ रहा है। टीम के कई मुख्य खिलाड़ियों की फिटनेस समस्याओं को देखते हुए बोर्ड जल्द ही भारतीय टीम के मुख्य फिजियो कमलेश जैन के कामकाज और प्रदर्शन का रिव्यू करने जा रहा है।
कमलेश जैन को साल 2022 में नितिन पटेल की जगह भारतीय क्रिकेट टीम का मुख्य फिजियो बनाया गया था। लेकिन पिछले कुछ महीनों में जिस तरह से एक के बाद एक कई प्रमुख खिलाड़ी चोट के कारण टीम से बाहर हुए हैं, उसने बोर्ड प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह भी हाल ही में इस चोट की लिस्ट में शामिल होने वाले नए खिलाड़ी हैं।
चोट के कारण टीम चयन में खड़ी हो रही समस्या
जसप्रीत बुमराह के अलावा भी कई युवा और प्रमुख खिलाड़ी फिटनेस समस्याओं से जूझ रहे हैं। हर्षित राणा और नीतिश कुमार रेड्डी जैसे खिलाड़ी चोट की वजह से चयन के लिए उपलब्ध ही नहीं हो सके। इसके अलावा वॉशिंगटन सुंदर चोट के चलते पहला टेस्ट मैच नहीं खेल पाए थे और दूसरे टेस्ट में भी उनके खेलने पर सस्पेंस बना हुआ है। वहीं बल्लेबाज साई सुदर्शन को भी बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही टीम में जगह दी गई।
हाल ही में इंग्लैंड दौरे पर हुई व्हाइट-बॉल सीरीज के दौरान भी खिलाड़ियों की इंजरी को लेकर कई बार गंभीर चर्चाएं हुईं। टीम के कप्तान शुभमन गिल और मुख्य कोच गौतम गंभीर खिलाड़ियों के बार-बार चोटिल होने से काफी परेशान और नाखुश दिखे। दोनों ही दिग्गजों के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण रहा है, क्योंकि वे फिटनेस समस्याओं के कारण अपनी पसंद की मुख्य टीम के साथ मैदान में नहीं उतर पा रहे हैं।
कप्तान शुभमन गिल ने जाहिर किया दर्द
लॉर्ड्स में मिली हार के बाद कप्तान शुभमन गिल ने टीम की इंजरी की समस्या पर खुलकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि मैच के दिन सुबह मैदान पर आकर अचानक यह पता चलना कि कोई खिलाड़ी फिट नहीं है या चोटिल हो गया है, पूरी टीम रणनीति के लिए बहुत कठिन स्थिति होती है।
गिल ने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी केवल 80 फीसदी फिट है और आप पांच प्रमुख गेंदबाजों के साथ मैदान में उतरते हैं, तो ऐसे में अगर वह खिलाड़ी गेंदबाजी के दौरान पांच ओवर फेंककर मैदान से बाहर चला जाए, तो बाकी के ओवर कौन डालेगा? उन्होंने साफ माना कि भारतीय टीम को अपनी ओवरऑल फिटनेस में काफी सुधार करने की जरूरत है।
CoE और मेडिकल सपोर्ट स्टाफ पर उठे गंभीर सवाल
खिलाड़ियों की बढ़ती चोटों के बीच बेंगलुरु स्थित बोर्ड के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) और मेडिकल सपोर्ट सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, टीम के कुछ सीनियर खिलाड़ी अपनी चोटों के इलाज और परामर्श के लिए बोर्ड के बाहर के निजी डॉक्टरों और विशेषज्ञों से भी सलाह ले रहे हैं।
इसके अलावा, पूर्व स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच सोहम देसाई की जगह एड्रियन ले रू को लाए जाने के बाद हुए नए बदलावों को लेकर भी कुछ खिलाड़ी पूरी तरह से सहज महसूस नहीं कर रहे हैं।
बोर्ड तय करेगा सपोर्ट स्टाफ की जवाबदेही
बीसीसीआई से जुड़े एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि जब कप्तान और कोच को अपनी पहली पसंद के 15 खिलाड़ी ही फिट नहीं मिलेंगे, तो उनके लिए सर्वश्रेष्ठ प्लेइंग-11 चुनना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
सूत्रों के अनुसार, आज के समय में भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त होड़ है। इस चक्कर में कई खिलाड़ी खुद पर जरूरत से ज्यादा शारीरिक दबाव डालते हैं। ऐसे में सपोर्ट स्टाफ और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे समय रहते खिलाड़ियों की फिटनेस पर सही फैसला लें और किसी भी खिलाड़ी को लेकर जल्दबाजी या जोखिम न उठाएं। इसी वजह से बोर्ड अब पूरे मेडिकल और सपोर्ट सिस्टम की समीक्षा करने जा रहा है।
श्रीलंका सीरीज के बाद बड़े फेरबदल के संकेत
भारतीय टीम का आने वाला क्रिकेट कैलेंडर काफी व्यस्त है, जिसमें श्रीलंका के खिलाफ होने वाले दो टेस्ट मैच भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस सीरीज के खत्म होते ही बीसीसीआई हेड फिजियोथेरेपिस्ट और टीम डॉक्टर के पदों के लिए नए चेहरों की तलाश शुरू कर सकता है। फिलहाल कमलेश जैन हेड फिजियो और डॉ. रिजवान खान टीम डॉक्टर की भूमिका निभा रहे हैं।
टीम इंडिया के खिलाड़ियों की लगातार बढ़ती चोटों और सपोर्ट स्टाफ में बदलाव को लेकर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में अपनी बात जरूर शेयर करें!

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